Ranchi: बचत, खर्च में कटौती और “त्याग” को लेकर चल रही राष्ट्रीय बहस के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते हुए 9 बिंदुओं वाला तीखा राजनीतिक संदेश जारी किया है. पार्टी ने कहा कि यदि देशहित में त्याग की जरूरत है, तो इसकी शुरुआत आम जनता से नहीं बल्कि सत्ता, सरकारी तंत्र और कॉरपोरेट घरानों से होनी चाहिए.
सरकार आम जनता, किसानों, छोटे उद्योगों और युवाओं की कर रही अनदेखी
झामुमो ने प्रधानमंत्री को संबोधित संदेश में मांग की, कि वे एक वर्ष तक विदेश यात्राएं, रोड शो और भाजपा की राजनीतिक रैलियां स्थगित करें. साथ ही पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देकर आम जनता, किसानों, छोटे उद्योगों और युवाओं की अनदेखी कर रही है.

पार्टी ने प्रधानमंत्री से बड़े उद्योगपतियों के ऋण माफ करने पर रोक लगाने, मंत्रियों और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के काफिलों पर खर्च कम करने तथा जल, जंगल और जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों को “कॉरपोरेट मित्रों” को सौंपना बंद करने की मांग की.
देशी कृषि उत्पादों को संरक्षण देने की मांग
झामुमो ने कहा कि देश के मध्यम और लघु उद्योगों को बढ़ावा देने, स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने और किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता है. पार्टी ने विदेशी खाद्य भंडारण नीति पर भी सवाल उठाते हुए देशी कृषि उत्पादों को संरक्षण देने की मांग उठाई.
सोने की खरीद पर संयम की अपील को लेकर भी झामुमो ने केंद्र सरकार को घेरा. पार्टी ने कहा कि भारतीय समाज में सोना केवल विलासिता नहीं बल्कि महिलाओं का “स्त्रीधन” और सामाजिक सुरक्षा का प्रतीक है, इसलिए इस पर टिप्पणी सामाजिक भावनाओं से जुड़ा विषय है.
झामुमो ने केंद्र सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि आर्थिक नीतियों और संभावित प्रतिबंधात्मक कदमों के जरिए देश में “लॉकडाउन जैसे हालात” पैदा करने की कोशिश हो रही है, जिससे रोजगार और शिक्षा दोनों प्रभावित हो सकते हैं.
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