Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के उपाध्यक्ष सह मीडिया चेयरमैन सतीश पॉल मुंजनी ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों, लगातार बढ़ती महंगाई और केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश की जनता आज महंगाई की सबसे बड़ी मार झेल रही है, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जनता को राहत देने के बजाय “राजनीतिक दिखावा” और “इवेंट मैनेजमेंट” में व्यस्त हैं. सतीश पॉल मुंजनी ने कहा कि एक ओर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि से परिवहन लागत बढ़ रही है, जिससे खाद्य पदार्थों, दूध, रसोई गैस और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दाम लगातार आसमान छू रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री द्वारा “दो गाड़ियों के काफिले” का प्रदर्शन कर जनता को भावनात्मक रूप से प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है.
परिवहन लागत बढ़ने से आम जनता पर असर
सतीश पॉल मुंजनी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों तक बड़े-बड़े काफिलों और वीआईपी संस्कृति में चलने वाली सरकार आज अचानक सादगी का प्रदर्शन कर रही है. देश की जनता पूछ रही है कि जब महंगाई चरम पर है, बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है और गरीब की थाली महंगी हो चुकी है, तब यह “सादगी प्रदर्शन” आखिर किसके लिए किया जा रहा है?

“दो गाड़ियों के काफिले” को बताया राजनीतिक प्रदर्शन
उन्होंने कहा कि देश में भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सरकारें कई राज्यों में सत्ता में हैं, जहां मुख्यमंत्री, मंत्रीगण और जनप्रतिनिधियों के बड़े सरकारी काफिले चलते हैं. यदि प्रधानमंत्री वास्तव में सादगी और सरकारी खर्च कम करने की बात कर रहे हैं, तो भाजपा शासित राज्यों में भी इस दिशा में ठोस पहल की जानी चाहिए. साथ ही, जनता को यह भी बताया जाना चाहिए कि महंगाई कम करने के लिए केंद्र सरकार की क्या ठोस रणनीति है. उन्होंने आगे कहा कि यदि प्रधानमंत्री को वास्तव में जनता की चिंता है, तो प्रतीकात्मक दिखावे से आगे बढ़ते हुए पेट्रोल-डीजल के दाम कम किए जाएं, एक्साइज ड्यूटी घटाई जाए, रसोई गैस सिलेंडर सस्ता किया जाए तथा महंगाई नियंत्रण के लिए प्रभावी और ठोस नीति लागू की जाए.
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पेट्रोल-डीजल के दाम घटाने की मांग
सतीश पॉल मुंजनी ने कहा कि देश की जनता अब कैमरे के सामने होने वाले प्रतीकात्मक आयोजनों से आगे बढ़कर वास्तविक आर्थिक राहत चाहती है. भाजपा सरकार की प्राथमिकता जनता की परेशानियों का समाधान नहीं, बल्कि प्रचार और इवेंट मैनेजमेंट बन चुकी है. महंगाई से त्रस्त देश अब जवाब मांग रहा है कि आखिर जनता की जेब पर बोझ डालकर किसका विकास किया जा रहा है.
