SAURAV SINGH
Ranchi: पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की सनसनीखेज हत्या के तार अब सीधे तौर पर झारखंड से जुड़ते नजर आ रहे हैं. झारखंड समेत चार राज्यों के खूंखार अपराधियों की इस मर्डर सिंडिकेट में संलिप्तता सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है.
जानकारी के मुताबिक जांच एजेंसी की जांच में खुलासा हुआ है कि हाईटेक मर्डर को अंजाम देने के लिए जिस कार का इस्तेमाल किया गया था, वह झारखंड की ही थी. इस अंतरराज्यीय नेक्सस को देखते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक विशेष टीम का गठन किया है, जिसमें झारखंड के रांची और धनबाद के तेजतर्रार अफसरों को कमान सौंपी गई है.

झारखंड से लिफ्ट की गई थी निसान माइक्रा कार
सीबीआई और पुलिस जांच में जो सबसे बड़ा खुलासा हुआ है, वह वारदात में इस्तेमाल की गई निसान माइक्रा कार को लेकर है. जांच के मुताबिक, शूटरों को बैकअप देने और भागने के लिए जिस गाड़ी का इंतजाम किया गया था, वह बिहार की नहीं बल्कि झारखंड की थी. अपराधियों ने झारखंड से इस कार को बाकायदा लिफ्ट (चोरी या अगवा) किया था. इसके बाद पकड़े जाने के डर से कार का चेसिस नंबर पूरी तरह घिस दिया गया और उस पर फर्जी नंबर प्लेट लगा दी गई. इस गाड़ी का इंतजाम बिहार के बक्सर से पकड़े गए शूटर और फंड मैनेजर मयंक राज मिश्र ने किया था.
CBI की SIT में झारखंड के जांबाज अफसर
मामले की गंभीरता और झारखंड कनेक्शन को देखते हुए, सीबीआई ने आठ सदस्यीय जो स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई है, उसमें झारखंड के अधिकारियों को अहम जिम्मेदारी दी गई है. जिनमें धनबाद के डीएसपी विकास पाठक को इस टीम का मुख्य हिस्सा बनाया गया है और इसके साथ ही रांची के डीएसपी कुलदीप और पटना के डीएसपी अमित कुमार को भी शामिल किया गया है. इस पूरी टीम की कमान नई दिल्ली के डीआईजी पंकज कुमार सिंह और कोलकाता के ज्वाइंट डायरेक्टर संभाल रहे हैं.
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सिग्नल ऐप पर लोकेशन ट्रैकिंग और एक करोड़ की सुपारी
जांच में यह बात साफ हुई है कि चंद्रनाथ रथ की हत्या का ताना-बाना बेहद हाईटेक था. कोलकाता से करीब 20 किलोमीटर दूर मध्यमग्राम के शैलेशपाड़ा में छह मई की रात हुए इस हत्या के लिए एक करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट तैयार किया गया था. शूटरों को सिर्फ हत्या के लिए 70 लाख रुपये दिए गए थे.
हत्या में विदेशी हथियारों का इस्तेमाल
हत्या के लिए ब्लैक मार्केट से करीब 10-10 लाख रुपये की दो ‘ग्लॉक 47 एक्स’ स्तर की अत्याधुनिक पिस्टल खरीदी गई थीं. चश्मदीदों के मुताबिक, शूटरों ने नॉन-स्टॉप फायरिंग की थी, जो किसी देसी कट्टे से मुमकिन नहीं थी.
अपराधियों को चंद्रनाथ रथ की तस्वीरें और उनका पल-पल का मूवमेंट ‘सिग्नल ऐप के जरिए भेजा जा रहा था. करीब एक महीने से उनकी रेकी की जा रही थी, हालांकि इस कांड के तार झारखंड, बिहार और यूपी से जुड़े हैं, लेकिन असली मास्टरमाइंड पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम का ही एक स्थानीय व्यक्ति है. उसी ने शूटरों को सिग्नल ऐप पर हत्या का आखिरी ऑर्डर दिया था. सीबीआई अब उस स्थानीय चेहरे की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है.
डिजिटल फुटप्रिंट, UPI पेमेंट ने खोल दी पोल
शूटरों ने बचने की लाख कोशिशें की लेकिन डिजिटल इंडिया के दौर में एक छोटी सी गलती भारी पड़ गई. बक्सर के शूटर मयंक राज मिश्र को इस पूरे ऑपरेशन का फंड मैनेजर बनाया गया था. झारखंड से गाड़ी लेकर यूपी और बंगाल की सीमा में दाखिल होने के दौरान, मयंक ने रास्ते के सभी टोल नाकों पर अपने मोबाइल से ऑनलाइन पेमेंट की थी. जब बंगाल पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने हावड़ा के बाली टोल गेट के डिजिटल ट्रांजैक्शन को खंगाला, तो मयंक का नाम सामने आ गया और इसी सुराग के दम पर पुलिस ने तीन शूटरों राज सिंह, मयंक राज मिश्र और विक्की मौर्या को धर दबोचा.
चुनाव के दौरान भी हुई थी कोशिश, CCTV में कैद हुआ रूट मैप
सूत्रों का कहना है कि शूटर बंगाल चुनाव के दूसरे चरण से पहले ही चंद्रनाथ को मारना चाहते थे. वे उनके बेहद करीब तक पहुंच चुके थे, लेकिन भारी सुरक्षा और चुनावी भीड़ के कारण तब उन्हें कदम पीछे खींचने पड़े.
सीबीआई के हाथ लगे नए सीसीटीवी फुटेज से साफ हुआ है कि हत्या वाले दिन शाम 4:05 बजे से लेकर 6:55 बजे तक यह कार बारासात के 11 नंबर रेलवे फाटक के पास खड़ी थी. कत्ल को अंजाम देने के बाद सभी अपराधी दोहड़िया इलाके से अलग-अलग भागे और रात 11 बजे सियालदह स्टेशन पर इकट्ठा होकर झारखंड-बिहार की ट्रेनों में सवार हो गए. फिलहाल, सीबीआई की एसआईटी झारखंड और बिहार के अन्य संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है ताकि इस खूनी सिंडिकेट के पीछे छिपे सबसे बड़े चेहरे को बेनकाब किया जा सके.
