Gumla : झारखंड के गुमला जिला को जिला बने आज 44 वर्ष पूरे हो गए, 18 मई 1983 को गुमला को आधिकारिक रूप से जिले का दर्जा मिला था. जिला स्थापना दिवस के अवसर पर सोमवार को जिलेभर में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, मुख्य कार्यक्रम “रन फॉर गुमला” रहा, जिसमें उपायुक्त दिलेश्वर महतो समेत कई प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए. शहर के विभिन्न चौक-चौराहों से गुजरी इस दौड़ ने लोगों के भीतर उत्साह और गौरव का माहौल पैदा किया. गौरतलब है कि जिला बनने से पहले गुमला विकास के मामले में काफी पीछे माना जाता था. लंबे आंदोलन और जनसंघर्ष के बाद इसे जिला का दर्जा मिला था. जिला बनने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत हुई, डीसी समेत कई विभागीय कार्यालय स्थापित हुए और शासन व्यवस्था में सुधार देखने को मिला. हालांकि, लोगों का कहना है कि जिस बड़े विकास की उम्मीद के साथ जिला बनाने की मांग की गई थी, वह सपना अब तक पूरी तरह साकार नहीं हो पाया है.
“कई क्षेत्रों में बदली है गुमला की तस्वीर”: डीसी दिलेश्वर महतो

उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने कहा कि गुमला से उनका पुराना जुड़ाव रहा है और उन्होंने जिले को लगातार बदलते देखा है. उनके अनुसार सड़कों के निर्माण, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली-पानी और मूलभूत सुविधाओं के विस्तार सहित कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम हुआ है, उन्होंने कहा कि आज गुमला की तस्वीर पहले से काफी बदली हुई नजर आती है. वहीं अपर समाहर्ता शशिंद्र बड़ाइक ने भी माना कि जिला बनने के बाद लोगों को प्रशासनिक सुविधाएं आसानी से मिलने लगी हैं और ग्रामीण इलाकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचा है.
खेल नगरी की पहचान कमजोर पड़ने का दर्द
गुमला के खेल प्रशिक्षक जुनू रैन ने कहा कि जिले में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन खिलाड़ियों को आज भी वह सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं जिसकी जरूरत है, उन्होंने कहा कि संयुक्त बिहार के दौर में गुमला की पहचान खेल नगरी के रूप में थी, लेकिन वर्तमान समय में खिलाड़ियों के लिए पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षण व्यवस्था नहीं होने से स्थिति कमजोर हुई है.
“विकास हुआ, लेकिन जितना होना चाहिए था उतना नहीं”
सामाजिक कार्यकर्ता संतोष कुमार सिंह ने कहा कि जिला बनने के बाद दूरदराज क्षेत्रों तक विकास जरूर पहुंचा है, लेकिन आज भी सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी समस्याएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं. उनका मानना है कि प्रशासनिक स्तर पर क्षमता होने के बावजूद सरकार से पर्याप्त सहयोग नहीं मिलने के कारण विकास की रफ्तार धीमी है. स्थानीय युवाओं ने भी रोजगार और अवसरों की कमी पर चिंता जताई, युवाओं का कहना है कि यदि सरकार और प्रशासन की ओर से सही दिशा में प्रयास किए जाएं तो गुमला विकास के नए आयाम स्थापित कर सकता है.
शिक्षा और स्वास्थ्य अब भी बड़ी चुनौती
साहित्यकार, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता अजय किशोर नाथ पांडे ने कहा कि 44 वर्षों का समय कम नहीं होता, लेकिन आज भी जिले के कई ग्रामीण इलाके शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. उन्होंने कहा कि गुमला में संसाधनों और संभावनाओं की कमी नहीं है, जरूरत केवल ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ काम करने की है.
स्थापना दिवस पर लोगों की बड़ी उम्मीद
स्थापना दिवस के मौके पर लोगों के बीच यह चर्चा भी रही कि जिला बनने और झारखंड राज्य गठन के बाद जिस स्तर का विकास दिखना चाहिए था, वह अब तक पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर पाया है. लोगों ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर जिले के विकास को नई दिशा देंगे.
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