Hazaribagh: कोयलांचल क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की घोर अनदेखी के खिलाफ मंगलवार को जन-आक्रोश की एक अभूतपूर्व तस्वीर देखने को मिली. सीसीएल अरगडा क्षेत्र में पिछले 25 दिनों से जारी बिजली-पानी के घोर संकट, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल के नेतृत्व में विशाल महाप्रबंधक (जीएम) कार्यालय का घेराव किया गया. सांसद के एक आह्वान पर क्षेत्र की 14 पंचायतों से हजारों की संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग, पुरुष और बच्चे सड़कों पर उतर आए. इस ऐतिहासिक घेराव और जनता के उग्र तेवरों को देखकर सीसीएल के शीर्ष अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए.

गौरतलब है कि इस सुदूरवर्ती इलाके की करीब एक लाख की आबादी मूलभूत जरूरतों के लिए पूरी तरह सीसीएल प्रबंधन पर निर्भर है, लेकिन पिछले करीब एक महीने से यहां हाहाकार मचा हुआ था. स्थानीय जनता की इसी सुध लेते हुए सांसद ने दो दिन पहले इस आंदोलन का शंखनाद किया था, जो मंगलवार को एक बड़े जन-आंदोलन में बदल गया.
दफ्तर के बाहर गूंजे नारे, दोहरी नीति पर सांसद का कड़ा प्रहार
आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सीसीएल प्रबंधन की तानाशाही के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और ‘बिजली-पानी देना होगा’ के नारे बुलंद किए. इस विशाल धरने की अध्यक्षता डाडी भाजपा मंडल अध्यक्ष राजदीप प्रसाद ने की, जबकि मंच संचालन रंजीत पांडेय और पुरुषोत्तम पाण्डेय ने संयुक्त रूप से संभाला.
भीड़ को संबोधित करते हुए सांसद मनीष जायसवाल ने सीधे अफसरों को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि बिजली और पानी जैसी बुनियादी चीजों को रोककर एक लाख लोगों को दूषित पानी पीने पर मजबूर करना बेहद शर्मनाक है.उन्होंने प्रबंधन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “अफसरों के लिए अलग और आम मजदूरों-जनता के लिए अलग कानून अब इस धरती पर नहीं चलेगा. गिद्दी-ए सीसीएल अस्पताल का हाल यह है कि वहां 5 डॉक्टर तैनात हैं, लेकिन पूरी डिस्पेंसरी में महज एक बीपी नापने की मशीन है. हमारे प्रयासों से स्वीकृत हुआ गिद्दी पुल का काम भी ठप्प पड़ा है. कॉलोनियों में रहने वाले कर्मचारी नरकीय जीवन जी रहे हैं और प्रबंधन सीएसआर के नाम पर केवल कागजी विकास दिखा रहा है.” सांसद ने दो टूक चेतावनी दी कि यह आखिरी मौका है, अगर अधिकारी नहीं सुधरे तो जनता उनका बोरिया-बिस्तर समेटने में देर नहीं करेगी.
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