सुधरेगा बिजली का ढांचा: पावर सिस्टम इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट के तहत खर्च होंगे 578.2 करोड़, रांची-जमशेदपुर में एनर्जी अकाउंटिंग शुरू, चोरी पर लगेगा अंकुश

Ranchi: बिजली बर्बादी और चोरी रोकने के लिए रांची और जमशेदपुर एरिया में फीडर और डीटी लेवल पर सिस्टम मीटरिंग की जाएगी....

image: AI generated

Ranchi: बिजली बर्बादी और चोरी रोकने के लिए रांची और जमशेदपुर एरिया में फीडर और डीटी लेवल पर सिस्टम मीटरिंग की जाएगी. इस पर 165 करोड़ खर्च होंगे. यह काम जीनस  और सिक्योर एजेंसियां मिलकर कर रही हैं. पावर सिस्टम इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट के तहत राज्य में बिजली के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 578.2 करोड़ खर्च किए जाएंगे. इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य रांची और जमशेदपुर जैसे बड़े शहरों में बिजली चोरी रोकना, बिलिंग को शत-प्रतिशत सटीक बनाना और अत्याधुनिक आईटी सॉफ्टवेयर के जरिए पावर मैनेजमेंट को सुधारना है. 

रांची में लगेंगे 3.5 लाख स्मार्ट मीटर

योजना के तहत रांची के साढ़े तीन लाख उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे. इस पूरे काम की कुल लागत 235 करोड़ है. इसमें से 95 करोड़ (40%) केंद्र सरकार और बाकी 60% राशि वर्ल्ड बैंक देगा. यह काम ‘जीनस’ (Genus) एजेंसी को आवंटित किया जा चुका है.

आईटी हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और सुपरविजन

स्मार्ट मीटरिंग को सुचारू रूप से चलाने और फील्ड सुपरविजन के लिए आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है. इस पर 143 करोड़ खर्च होंगे, जिसमें से 84 करोड़ (59%) केंद्र सरकार और 59 करोड़ (41%) वर्ल्ड बैंक वहन करेगा. यह जिम्मेदारी फ्लुएंटग्रिड कंपनी को सौंपी गई है.

आईटी प्रोजेक्ट्स ऑफिस और कंसल्टेंट

प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग और कंसल्टेंसी के लिए 8 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. इसमें से 5 करोड़ (63%) केंद्र और 3 करोड़ (37%) वर्ल्ड बैंक देगा. इसका काम डीटीटीआइएलएलपी को मिला है. 

Read Also: पारिवारिक विवाद में बेटे ने की पिता की हत्या

पावर मैनेजमेंट के लिए विशेष सॉफ्टवेयर

बिजली की मांग और आपूर्ति के सटीक प्रबंधन के लिए 9.2 करोड़ की लागत से एक आधुनिक सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है. इसमें केंद्र की हिस्सेदारी 7.2 करोड़ (78%) और वर्ल्ड बैंक की 2 करोड़ (22%) है. यह काम भी डीटीटीआइएलएलपी के जिम्मे है.

बिजनेस प्रोसेस अपग्रेडेशन 

बिजली विभाग के आंतरिक कामकाज, एचआर मैनुअल और वित्तीय प्रबंधन को कॉर्पोरेट स्तर पर अपग्रेड करने के लिए 16 करोड़ का खर्च किए जाएंगे. यह शत-प्रतिशत वर्ल्ड बैंक फंडेड है और इसके लिए प्रसिद्ध कंसल्टेंसी फर्म केपीएमजी  को चुना गया है.

ट्रेनिंग सेंटर का कायाकल्प

कर्मचारियों को नई तकनीकों से लैस करने के लिए ट्रेनिंग सेंटर्स को अपग्रेड किया जाएगा. इस पर 2 करोड़ खर्च होंगे (100% वर्ल्ड बैंक फंडेड), और इसका जिम्मा  डीटीटीआइएलएलपी को दिया गया है.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *