Ranchi : झारखंड में मानसून आने से पहले बालू किल्लत को दूर करने और अवैध खनन पर लगाम लगाने की दिशा में बड़ी कामयाबी मिली है. राज्य के विभिन्न जिलों में उपायुक्तों (डीसी) द्वारा कई महत्वपूर्ण बालू घाटों के लीज डीड (पट्टा विलेख) पर हस्ताक्षर कर दिए गए हैं, जिसके बाद अब इनके संचालन के लिए सीटीई-सीटीओ (CTE-CTO) की मंजूरी की प्रक्रिया तेजी से चल रही है. जिलों से मिल रही जानकारी के मुताबिक फ़िलहाल हस्ताक्षरित लीज डीड वाले प्रमुख घाटों में गोड्डा के राहा और झिलुआ; जामताड़ा का असनचुआ; रांची के श्यामनगर व चोकेसरेन्ग; बोकारो के पिछरी-2 व खेतको चालकारी; तथा जमशेदपुर के कोरेयामोहनपाल और सुवर्णरेखा बालू घाट शामिल हैं. इन स्वीकृत घाटों के साथ लोचनी, मकनी, गारीहलमाद और खेतको जैसे रणनीतिक स्थानों पर स्टॉकयार्ड भी बनाए गए हैं.इसके साथ ही राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) द्वारा 35 नए बालू घाटों को पर्यावरण स्वीकृति (EC) प्रदान की जा गई है.

कुल 192.99 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इन ईसी-अनुमोदित घाटों का जिलावार विवरण:
– पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर): 85.40 हेक्टेयर (सबसे अधिक)
– बोकारो: 30.86 हेक्टेयर
– हजारीबाग: 15.26 हेक्टेयर
– दुमका: 13.54 हेक्टेयर
– रांची: 12.50 हेक्टेयर
– जामताड़ा व गोड्डा: क्रमशः 9.60 और 9.59 हेक्टेयर
– लातेहार, खूंटी व रामगढ़: क्रमशः 7.69, 4.54 और 4.01 हेक्टेयर
वार्षिक क्षमता 3.5 से 5.0 करोड़ सीएफटी आंकी गई:
एक हेक्टेयर बालू घाट से औसतन 4 से 5 लाख सीएफटी (CFT) बालू निकाला जा सकता है. इन सभी स्वीकृत घाटों की कुल वार्षिक क्षमता 3.5 से 5.0 करोड़ सीएफटी आंकी गई है.राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के मानसून प्रतिबंध लागू होने से पहले, मात्र एक महीने में ही करीब 1 से 2 करोड़ सीएफटी बालू का सुरक्षित भंडारण (स्टॉक) किया जा सकता है, जिससे बरसात के महीनों में भी राज्य में निर्माण कार्यों के लिए बालू की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी.
