Hazaribagh: ग्रामीण इलाकों में इन दिनों डीजल और पेट्रोल का अभूतपूर्व संकट गहरा गया है. हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि गांवों में आधुनिक गाड़ियों के पहिए थमने लगे हैं और दशकों पुराना ‘बैलगाड़ी’ का दौर फिर से लौट आया है. ग्रामीण क्षेत्रों के पेट्रोल पंप लगातार बंद मिल रहे हैं. आपूर्ति ठप होने के कारण यदि किसी पंप पर तेल पहुंच भी रहा है, तो महज एक-दो दिन के भीतर ही पंप ‘ड्राई’ हो जा रहा है. इस ईंधन संकट का सबसे सीधा और बड़ा असर राष्ट्रीय राजमार्ग-522 पर देखने को मिल रहा है, जहां डीजल-पेट्रोल की भारी कमी के कारण व्यावसायिक और निजी वाहनों का परिचालन काफी हद तक कम हो गया है.

बाइक ढकेलने की नौबत
पेट्रोल पंपों के बंद रहने का सबसे दर्दनाक नजारा सड़कों पर देखने को मिल रहा है. तेल खत्म हो जाने के कारण चिलचिलाती धूप में लोग मीलों दूर तक अपनी मोटरसाइकिल और स्कूटी को ढकेलते हुए ले जाने को मजबूर हैं. ग्रामीण इलाकों में एक गांव से दूसरे गांव या बाजार जाने वाले बाइक सवारों को रास्ते में अचानक पेट्रोल खत्म होने के कारण भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है. राहगीरों का कहना है कि पांच से दस किलोमीटर के दायरे में एक भी पंप खुला नहीं मिल रहा, जिससे स्थिति बेहद दयनीय हो गई है.
सामान ढोने के लिए बैलगाड़ी बनी सहारा
इस संकट ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की जिंदगी को पटरी से उतार दिया है. कभी खेतों की शोभा बढ़ाने वाली और इतिहास के पन्नों में सिमट रही बैलगाड़ियां एक बार फिर ग्रामीण सड़कों पर दौड़ती दिख रही हैं. खेतों से अनाज मंडी तक पहुंचाना हो या भारी व्यावसायिक सामान की ढुलाई करनी हो, ग्रामीण अब पूरी तरह बैलगाड़ियों पर निर्भर हो चुके हैं. ग्रामीणों का कहना है कि ट्रैक्टर और पिकअप वैन के लिए डीजल उपलब्ध नहीं है, ऐसे में बैलगाड़ी ही उनका सहारा बची है.
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मनमाना किराया वसूल रहे वाहन चालक
सड़कों पर गाड़ियों की संख्या कम होने का सीधा फायदा भाड़े के वाहन चालकों ने उठाना शुरू कर दिया है. डीजल-पेट्रोल की कमी का हवाला देकर कमर्शियल गाड़ियों के चालकों ने किराए में बेतहाशा बढ़ोतरी कर दी है. मजबूरी में आम यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए डेढ़ से दो गुना तक ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं.
पंप खुलते ही उमड़ रही भीड़
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि ग्रामीण इलाकों के अधिकांश पंपों पर ‘नो स्टॉक’ का बोर्ड लटका रहता है. जैसे ही किसी पंप पर टैंकर पहुंचता है, वहां तेल लेने के लिए हाहाकार मच जाता है. चंद घंटों के भीतर ही पूरा स्टॉक खत्म हो जाता है और देर से पहुंचने वाले लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ता है.
खेती-किसानी और व्यापार पर बड़ा संकट
ईंधन की इस किल्लत ने केवल यातायात को ही प्रभावित नहीं किया है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापार और खेती-किसानी के काम को भी ठप कर दिया है. यदि जल्द ही ग्रामीण इलाकों के पेट्रोल पंपों पर तेल की नियमित आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो स्थिति और भी बदतर हो सकती है.
