Saraikela: चांडिल डैम पुनर्वास योजना से प्रभावित विस्थापितों के पुनर्वास कार्यों को लेकर एक बार फिर गंभीर आरोप सामने आए हैं. ईचागढ़ निवासी एवं चांडिल डैम विस्थापित संघर्ष समिति के सचिव विवेक सिंह बाबू ने उपायुक्त सरायकेला-खरसावां को आवेदन सौंपकर पुनर्वास कार्यालयों में कथित दलाली, भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग की है.

आवेदन में कुल 25 वर्तमान एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों के नाम शामिल किए गए हैं, जिन पर विस्थापितों के शोषण और अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं.
84 मौजा और 116 गांवों के विस्थापितों के शोषण का आरोप
विवेक सिंह का आरोप है कि चांडिल डैम जलाशय से प्रभावित 84 मौजा और 116 गांवों के विस्थापित पिछले लगभग 40 वर्षों से अपने अधिकारों से वंचित हैं. उनका कहना है कि पुनर्वास कार्यालय संख्या-2 चांडिल सहित अन्य संबंधित कार्यालयों में कथित मिलीभगत के कारण विस्थापितों के कार्यों में बाधा उत्पन्न की जा रही है.
मुआवजा और पुनर्वास कार्यों में अवैध वसूली का आरोप
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि मुआवजा भुगतान, प्लॉट आवंटन, नौकरी और पुनर्वास प्रमाण-पत्र जैसे कार्यों के लिए अवैध वसूली की जाती है. आरोप है कि दलालों और कुछ कर्मचारियों की सांठगांठ के कारण वास्तविक लाभुक आज भी अपने अधिकारों से वंचित हैं.
उच्चस्तरीय जांच की मांग
विस्थापितों की ओर से निगरानी ब्यूरो या एसीबी से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है. साथ ही नामजद कर्मचारियों की आय से अधिक संपत्ति की जांच, पुनर्वास कार्यालयों में बायोमेट्रिक उपस्थिति और सीसीटीवी लगाने तथा लंबित मामलों के निपटारे के लिए विशेष कैंप आयोजित करने की मांग भी की गई है.
प्रशासन का पक्ष
जिला प्रशासन के एक वरीय पदाधिकारी ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है और मामले की गंभीरता को देखते हुए तथ्यों का सत्यापन कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
