न्यूज वेव एक्सपोजः आईएएस और राज्य सेवा के अफसरों के ट्रांसफर- पोस्टिंग की इकोनॉमिक्स, जानिए एक अधिकारी की रवानगी पर कितना बैठता है बिल?

Ranchi: राज्य सरकार ने ब्यूरोक्रेसी की ओवरहॉलिंग करते हुए आईएएस कैडर से लेकर झारखंड प्रशासनिक सेवा (झाप्रसे) के जमीनी स्तर तक के...

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Ranchi: राज्य सरकार ने ब्यूरोक्रेसी की ओवरहॉलिंग करते हुए आईएएस कैडर से लेकर झारखंड प्रशासनिक सेवा (झाप्रसे) के जमीनी स्तर तक के 249 अधिकारियों को इधर से उधर तो कर दिया, लेकिन फाइलों के इस मूवमेंट के पीछे एक बड़ा ट्रांसफर इकोनॉमिक्स छिपा है. जनहित और प्रशासनिक जरूरतों के नाम पर हुए इन तबादलों के कारण राज्य के संचित कोष पर सीधे 4.35 करोड़ से लेकर 6.22 करोड़ रुपये तक का भारी-भरकम वित्तीय भार पड़ने का अनुमान है. नियमतः एक राजपत्रित अधिकारी की शिफ्टिंग पर सरकार को औसतन 1.75 लाख से 2.5 लाख रुपये तक का खर्च वहन करना पड़ता है

क्या कहता है सरकारी नियम

सरकारी नियमों के मुताबिक, जब भी किसी राजपत्रित अधिकारी का तबादला जनहित या प्रशासनिक अनिवार्यताओं के तहत होता है, तो उसकी पूरी शिफ्टिंग का खर्च राज्य सरकार उठाती है. झारखंड सेवा नियमावली के प्रावधानों के अनुसार, एक औसतन अधिकारी के स्थानांतरण पर 1.75  लाख से लेकर 2.5 तक का अनुमानित खर्च आता है. यह अंतर अधिकारी के वेतनमान (पे-मैट्रिक्स), उनके परिवार के सदस्यों की संख्या और पुराने कार्यस्थल से नए कार्यस्थल की भौगोलिक दूरी पर निर्भर करता है.

यात्रा भत्ता का पूरा गणित

तबादलों पर होने वाले कुल खर्च का चौथा और बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा यात्रा भत्ता यानी टीए के रूप में आवंटित होता है. सरकारी खजाने से इस मद में कुल खर्च का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा खर्च किया जाता है. यदि प्रति अधिकारी औसतन 2,00000 रुपये के कुल ट्रांसफर बजट को आधार माना जाए, तो इस हिसाब से प्रत्येक अधिकारी और उनके परिवार की यात्रा पर औसतन 20,000 रुपये का खर्च बैठता है.इस राशि का उपयोग अधिकारी स्वयं, उनके जीवनसाथी और आश्रित बच्चों को पुराने पोस्टिंग स्थल से नए जिले या कार्यस्थल तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए किया जाता है. नियमावली के अनुसार, श्रेणी-1 और वरिष्ठ राजपत्रित अधिकारियों को ट्रेन में प्रथम श्रेणी या हवाई मार्ग (नियमों के दायरे में) से यात्रा करने की पात्रता होती है. यदि अधिकारी अपने निजी वाहन या सड़क मार्ग से नए जिले की दूरी तय करते हैं, तो उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित प्रति किलोमीटर की दर से ईंधन और गाड़ी का माइलेज भत्ता दिया जाता है. इस प्रकार, अधिकारियों के मूवमेंट को सुगम बनाने के लिए यह राशि सीधे उनके दावों के आधार पर संचित कोष से भुक्तानी की जाती है.

इंटर-डिस्ट्रिक्ट शिफ्टिंग: एक जिले से दूसरे जिले का फासला

इस महा-तबादले की सबसे खास बात यह है कि इसमें 85 फीसदी  से अधिक अधिकारियों का तबादला एक जिले से दूसरे जिले में हुआ है. सचिवालय (रांची) में तैनात कुछ संयुक्त सचिव रैंक के अफसरों को छोड़कर, सभी एसडीओ, डीटीओ और आईएएस अधिकारियों को अपनी भौगोलिक सीमाएं बदलनी पड़ी हैं. गढ़वा से देवघर, साहिबगंज से सिमडेगा या दुमका से जमशेदपुर जैसे लंबे रूटों पर जिन अफसरों की पोस्टिंग हुई है, उनके मामले में सामान ढुलाई व्यय’ और ‘यात्रा भत्ता’ अपने अधिकतम स्तर पर रहेगा. लगभग 200 से अधिक परिवारों का एक साथ पूरे राज्य में मूवमेंट होने से जिला स्तर पर सरकारी गेस्ट हाउसों, सर्किट हाउसों और नए आवासों के आवंटन की लॉजिस्टिक लागत भी अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ जाती है.

स्थानांतरण अनुदान 

यह अधिकारी को मिलने वाली एकमुश्त राशि होती है. यह सीधे तौर पर उनके मूल वेतन और ग्रेड पे से लिंक होती है. वर्तमान नियमों के तहत, यह आमतौर पर अधिकारी के एक महीने के मूल वेतन का 80% तक हो सकता है. नए घर में व्यवस्थाएं सेट करने के लिए यह राशि दी जाती है, जो कुल खर्च का सबसे भारी हिस्सा (लगभग 40%) होती है.

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कार्यभार ग्रहण काल 

नियमों के मुताबिक, एक जिले से दूसरे जिले में जाने के लिए अधिकारी को 10 से 12 दिनों का जॉइनिंग टाइम (अवकाश) मिलता है. इस ट्रांजिट पीरियड के दौरान अधिकारी किसी भी पद पर एक्टिव नहीं रहता, लेकिन उसे इस पूरी अवधि का पूरा वेतन और भत्ता मिलता है. 

सामान ढुलाई व्यय 

वरिष्ठ अधिकारियों के पास सरकारी आवास का पूरा तामझाम, निजी सामान, गाड़ियां और घरेलू सामग्री होती है. इसे एक शहर से दूसरे शहर ले जाने के लिए अधिकृत ट्रकों और कंटेनरों का किराया सरकार देती है. यह भुगतान पूरी तरह से तय किलोमीटर और सामान के वजन (किलोग्राम) के सरकारी स्लैब के आधार पर किया जाता है. दूरी जितनी अधिक होगी, यह बिल उतना ही बड़ा होगा.

यात्रा भत्ता 

अधिकारी, उनकी पत्नी/पति और आश्रित बच्चों को पुराने पोस्टिंग स्थल से नए रेलवे स्टेशन या जिले तक जाने का प्रथम श्रेणी या सकेंड क्लास का ट्रेन किराया या सड़क मार्ग से यात्रा करने पर प्रति किलोमीटर की दर से ईंधन/गाड़ी का खर्च दिया जाता है.

संवर्गवार तबादलों का ब्रेकअप:

  • आईएएस कैडर: 36 वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी.
  • झाप्रसे (संयुक्त सचिव रैंक): 65 उच्च पदस्थ अधिकारी.
  • झाप्रसे (एसडीओ, डीटीओ और समकक्ष): 54 मैदानी स्तर के अफसर.
  • झाप्रसे (अन्य संवर्ग/स्तर): 81 अधिकारी.
  • झाप्रसे (विशेष सूची): 13 अन्य अधिकारी.
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