घर-घर कोल्हू अभियान को तेज करने का आह्वान, सांस्कृतिक धरोहर बचाने की अपील: राजीव रंजन

Lohardaga: पूर्व वार्ड पार्षद राजीव रंजन ने लोगों से पारंपरिक कोल्हू की विरासत को संरक्षित करने के लिए “घर-घर कोल्हू अभियान” से...

Lohardaga: पूर्व वार्ड पार्षद राजीव रंजन ने लोगों से पारंपरिक कोल्हू की विरासत को संरक्षित करने के लिए “घर-घर कोल्हू अभियान” से जुड़ने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि कोल्हू केवल तेल निकालने का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारी सभ्यता, संस्कृति, श्रम, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण जीवन की समृद्ध परंपरा का जीवंत प्रतीक है. यदि समय रहते इस सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियाँ अपनी जड़ों और पहचान से दूर होती चली जाएंगी.

आधुनिकता की दौड़ में विलुप्त हो रही पारंपरिक विरासत

राजीव रंजन ने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में हमारी अनेक पारंपरिक व्यवस्थाएँ धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं. कभी गांवों की पहचान रहे कोल्हू आज गिने-चुने स्थानों पर ही दिखाई देते हैं. यह केवल एक उपकरण का समाप्त होना नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही लोक संस्कृति और स्वावलंबी जीवन शैली का कमजोर पड़ना है. उन्होंने कहा कि कोल्हू ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्थानीय रोजगार और प्राकृतिक जीवन पद्धति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है.

हर परिवार को अभियान से जुड़ने की अपील

उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक परिवार अपने घर में कोल्हू का प्रतीक स्थापित करे और अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संकल्प ले. इससे नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं, पूर्वजों के श्रम और भारतीय संस्कृति की जड़ों से जोड़ने का अवसर मिलेगा. उन्होंने कहा कि यह अभियान किसी व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि समाज की साझा विरासत को बचाने का अभियान है.
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स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा 

राजीव रंजन ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा तभी मजबूत होगी, जब हम अपनी पारंपरिक तकनीकों, ग्रामीण संसाधनों और स्थानीय उत्पादन प्रणालियों को सम्मान देंगे. कोल्हू इसका उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसने वर्षों तक ग्रामीण परिवारों की आवश्यकताओं की पूर्ति की और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की. उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज के सभी वर्ग, विशेषकर युवा, इस अभियान से जुड़ें और अपनी सांस्कृतिक पहचान को सहेजने में सक्रिय भूमिका निभाएं. यदि हमारी परंपराएं सुरक्षित रहेंगी, तभी हमारी आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास, संस्कृति और मूल्यों से जुड़ी रहेंगी.

युवाओं से सांस्कृतिक संरक्षण में आगे आने का आह्वान 

अंत में उन्होंने कहा कि “घर-घर कोल्हू अभियान” को जन-जन का अभियान बनाने की जरूरत है. यह केवल अतीत को याद करने का प्रयास नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए अपनी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का संकल्प है. उन्होंने सभी नागरिकों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने और भारतीय संस्कृति के इस महत्वपूर्ण प्रतीक को संरक्षित करने की अपील की.

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