नक्सलियों की ‘जन अदालत’ वाले चुरचू में अब सज रही शराबियों की ‘मधुशाला’, लारा नदी का हुस्न हो रहा तार-तार

Hazaribagh: जो चुरचू प्रखंड कभी नक्सलियों के लाल आतंक और खौफनाक ‘जन अदालतों’ के लिए कुख्यात था, आज वहां की फिजां बदली...

Hazaribagh: जो चुरचू प्रखंड कभी नक्सलियों के लाल आतंक और खौफनाक ‘जन अदालतों’ के लिए कुख्यात था, आज वहां की फिजां बदली तो है, लेकिन शांति के इस दौर में एक नया और खतरनाक ग्रहण लग गया है. बेहतर पुलिसिंग और प्रशासनिक मुस्तैदी से चुरचू नक्सल मुक्त तो हो गया, लेकिन अब यहां शराबियों और असामाजिक तत्वों का साम्राज्य खड़ा होने लगा है. क्षेत्र की रीढ़ कही जाने वाली और अपनी अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर ‘लारा नदी’ इन दिनों हुड़दंगियों का सबसे बड़ा सेफ जोन बन चुकी है, जिससे स्थानीय समाज गहरे आक्रोश में है.

धुंधला पड़ने लगा लारा नदी की खूबसूरती का रंग

पहाड़ियों और पेड़ों के बीच कलकल बहती लारा नदी की शांत लहरें हर किसी का मन मोह लेती है. खासकर वीकेंड और छुट्टियों के दिनों में हजारीबाग और आस-पास के जिलों से भारी संख्या में सैलानी और सपरिवार लोग यहां पिकनिक मनाने आते है. लेकिन इसी खूबसूरत आबो-हवा के बीच अब दोपहर होते ही शराबियों की महफिलें सजने लगती है. सरेआम, बिना किसी कानूनी खौफ के नदी के पत्थरों और किनारों पर बैठकर जाम छलकाए जा रहे हैं, जिससे पूरे पर्यटन स्थल का माहौल दूषित हो रहा है.

कांच के टुकड़ों से लहूलुहान हो रही नदी, पर्यटकों में असुरक्षा का माहौल

इस शराबखोरी ने लारा नदी के पर्यावरण को भारी खतरे में डाल दिया है. नशे में धुत युवा शराब पीने के बाद खाली बोतलें पत्थरों पर ही फोड़ देते हैं या नदी में फेंक देते है. नदी किनारे बिखरे कांच के धारदार टुकड़े और प्लास्टिक का कचरा यहां आने वाले बच्चों और सैलानियों के लिए काल बन रहे है. स्थानीय महिलाओं ने बताया कि शराब के नशे में ये असामाजिक तत्व आपस में ही गाली-गलौज और मारपीट करने लगते है. हुड़दंग की इन लाइव तस्वीरों के कारण अब शरीफ और संभ्रांत परिवारों ने इस पिकनिक स्पॉट से तौबा करना शुरू कर दिया है.

बंदूक का खौफ तो खत्म हुआ, पर बोतल के आतंक से कब मिलेगी मुक्ति?

चुरचू के प्रबुद्ध नागरिकों ने संध्या न्यूज़ से बात करते हुए अपना दर्द बयां किया. उन्होंने कहा कि जिस धरती पर कभी नक्सलियों की समानांतर सरकार चलती थी, वहां आज अमन-चैन तो है, लेकिन शराबखोरी ने हमारी नई पीढ़ी को बर्बाद करना शुरू कर दिया है. ग्रामीणों का साफ कहना है कि बंदूक वाले नक्सलियों को तो पुलिस ने खदेड़ दिया, लेकिन इन बोतल वाले हुड़दंगियों पर लगाम लगाने में स्थानीय स्तर पर ढिलाई बरती जा रही है, जो आने वाले समय में किसी बड़ी अनहोनी या हिंसक वारदात को दावत दे रही है.

प्रशासन तुरंत संभाले कमान, वरना उग्र आंदोलन को बाध्य होगी जनता

इस गंभीर और शर्मनाक स्थिति को देखते हुए स्थानीय जनता ने हजारीबाग जिला प्रशासन और पुलिस कप्तान से सीधी गुहार लगाई है। ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि लारा नदी क्षेत्र को असामाजिक तत्वों से मुक्त कराने के लिए तुरंत पुलिस की एक ‘स्पेशल एंटी-रोमियो या क्विक रिस्पांस टीम’ तैनात की जाए और नियमित गश्त शुरू हो. सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीकर हुड़दंग मचाने वालों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाए, ताकि लारा नदी की पहचान, स्वच्छता और मर्यादा को दोबारा बहाल किया जा सके.

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