Ranchi: झारखंड में निजी क्षेत्र में स्थानीय युवाओं को 75 प्रतिशत आरक्षण देने के मुद्दे पर आजसू पार्टी ने राज्य सरकार पर बड़ा हमला बोला है. पार्टी के केंद्रीय महासचिव और प्रवक्ता संजय मेहता ने दावा किया है, कि सरकार का यह वादा पूरी तरह फर्जी और भ्रामक साबित हुआ है. संजय मेहता ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा. कि झारखंड सरकार जिस कानून का प्रचार कर रही थी, उस पर पहले ही झारखंड हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है. उन्होंने कहा कि इस बात की पुष्टि खुद श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग के आधिकारिक पत्र से हुई है.

अदालत ने कानून के अनुपालन पर लगा दी थी अंतरिम रोक
उन्होंने बताया कि “झारखंड नियोक्ता (स्थानीय उम्मीदवारों की नियुक्ति) अधिनियम 2021” और इसकी नियमावली 2022 को अदालत में चुनौती दी गई थी. झारखंड हाईकोर्ट में दायर याचिका WPC-5688/2024 में 11 दिसंबर 2024 को अदालत ने कानून के अनुपालन पर अंतरिम रोक लगा दी थी. आजसू नेता ने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना कानूनी और व्यावहारिक तैयारी के सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए यह कानून बनाया. उन्होंने कहा कि कंपनियों ने अदालत जाकर साफ कर दिया कि वे 75 प्रतिशत स्थानीय नियुक्ति के नियम को लागू नहीं करना चाहतीं, जबकि सरकार भी इस मामले में पूरी तरह कमजोर साबित हुई.
जमीनी स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था लागू नहीं
संजय मेहता ने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए, कि अब तक कितने स्थानीय युवाओं को निजी कंपनियों में 75 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिला है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को भ्रमित कर रही है और जमीनी स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की जमीन, संसाधन और प्रदूषण का बोझ झारखंड के लोग झेलते हैं, इसलिए निजी कंपनियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. अगर कंपनियां नियम मानने को तैयार नहीं हैं तो सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए थे.
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