भीषण गर्मी में गहराया जल संकट, 5 महीने से बंद पड़ी जलापूर्ति से ग्रामीण परेशान

Ranchi: राजधानी रांची के सोनाहातु प्रखंड अंतर्गत सोनाहातु और बारूहातु पंचायत में पिछले पांच महीनों से जलापूर्ति ठप रहने के कारण ग्रामीण...

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

Ranchi: राजधानी रांची के सोनाहातु प्रखंड अंतर्गत सोनाहातु और बारूहातु पंचायत में पिछले पांच महीनों से जलापूर्ति ठप रहने के कारण ग्रामीण गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहे हैं. भीषण गर्मी के बीच हालात इतने खराब हो गए हैं कि लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी पानी जुटाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. लगातार शिकायतों और गुहार के बावजूद व्यवस्था बहाल नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.

मुखिया ने उपायुक्त को सौंपा आवेदन

ग्रामीणों की समस्या को गंभीर बताते हुए सोनाहातु पंचायत के मुखिया विकास सिंह मुंडा ने रांची उपायुक्त को लिखित आवेदन सौंपकर तत्काल जलापूर्ति शुरू कराने की मांग की है. आवेदन में कहा गया है कि सोनाहातु पंचायत के बाजार टांड़ और सोनाहातु गांव सहित बारूहातु पंचायत के कई इलाकों में कांची नदी से पाइपलाइन के माध्यम से पेयजल आपूर्ति की जाती है, लेकिन बीते करीब पांच माह से सप्लाई पूरी तरह बंद पड़ी है.

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दूर-दराज के जलस्रोतों पर निर्भर ग्रामीण

मुखिया ने बताया कि भीषण गर्मी के इस दौर में पानी की किल्लत से आम जनजीवन प्रभावित हो गया है. ग्रामीणों को दूर-दराज के चापाकलों और अन्य जलस्रोतों पर निर्भर होना पड़ रहा है. कई स्थानों पर महिलाएं और बच्चे घंटों पानी भरने के लिए कतार में खड़े रहने को मजबूर हैं.

प्रशासनिक उदासीनता पर उठे सवाल

उन्होंने आरोप लगाया कि इस समस्या को लेकर ग्रामीणों द्वारा कई बार संबंधित विभाग और अधिकारियों को लिखित शिकायत दी गई. साथ ही प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से भी मामले को उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई. इससे लोगों में प्रशासनिक उदासीनता को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं.

समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

मुखिया विकास सिंह मुंडा ने उपायुक्त से मांग की है कि मामले को प्राथमिकता के आधार पर संज्ञान में लेते हुए जल्द से जल्द जलापूर्ति बहाल कराई जाए, ताकि गर्मी के इस मौसम में लोगों को राहत मिल सके. आवेदन की प्रतिलिपि अनुमंडल पदाधिकारी बुण्डू तथा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, बुण्डू के कनीय अभियंता को भी भेजी गई है.

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे.

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