Ranchi : झारखंड के करीब 4,345 प्रज्ञा केंद्र संचालकों और राज्य प्रबंधन के बीच विवाद बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है. झारखंड प्रदेश डिजिटल पंचायत सचिवालय प्रज्ञा केंद्र संचालक संघ ने सीएससी के राज्य प्रमुख शंभू कुमार को एक कड़ा चेतावनी पत्र भेजकर अल्टीमेटम दिया है. संघ ने साफ किया है कि यदि अगले तीन दिनों के भीतर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सम्मानजनक वार्ता नहीं की गई, तो आगामी एक जून से पूरे राज्य में डिजिटल स्ट्राइक और चरणबद्ध आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा. संघ का आरोप है कि सहायक कंपनियों के तानाशाही रवैये, मानसिक उत्पीड़न और आर्थिक शोषण के कारण जमीनी स्तर पर काम करने वाले संचालक बेहद तनाव में हैं.

प्रताड़ना से जा चुकी है तीन संचालकों की जान, कई पर अतिवादी कदम उठाने का खतरा
संघ द्वारा भेजे गए पत्र में अत्यंत दुखद और संवेदनशील खुलासे किए गए हैं. पत्र के अनुसार, प्रशासनिक दबाव और उत्पीड़न के चलते पूर्व में चतरा जिले के शैलेंद्र कुमार सिंह और जामताड़ा जिले के अनिल मंडल नामक दो प्रज्ञा केंद्र संचालकों ने आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठा लिया था. वहीं, एक अन्य संचालक अनिल हेम्ब्रम की डिप्रेशन के कारण मौत हो गई थी. संघ ने चेतावनी दी है कि वर्तमान में भी पलामू के मंटू कुमार व पंकज कुमार गुप्ता, धनबाद के अमीर राज पांडेय और चांडिल के चार संचालकों को एक सोची-समझी साजिश के तहत प्रताड़ित किया जा रहा है. आरोप है कि सहायक कंपनी के अविनाश कुमार, जिला प्रबंधकों और ब्लॉक प्रबंधकों के साथ मिलकर इन ऑपरेटरों का शोषण कर रहे हैं, जिससे ये संचालक भी कोई भी गंभीर या आत्मघाती कदम उठा सकते हैं.
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2012 से नहीं बदला रेट चार्ट, भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
प्रज्ञा केंद्र संचालकों ने सीएससी प्रबंधन और उसकी सहयोगी कंपनियों पर गंभीर आर्थिक शोषण और अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं. नियमों के मुताबिक हर साढ़े चार साल में रेट चार्ट संशोधित होना चाहिए था, लेकिन साल 2012 के बाद से इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है. 16 जनवरी 2026 को रांची के नागा बाबा खटाल परिसर में हुए दो दिवसीय धरने के दौरान प्रबंधन ने एक हफ्ते में इसे संशोधित करने का लिखित आश्वासन दिया था, जो आज तक पूरा नहीं हुआ. इसके अलावा एक ही पंचायत सचिवालय क्षेत्र में 6 से 8 सीएससी आईडी बांट दी गई हैं. साथ ही अधिकांश सरकारी सेवाएं पब्लिक डोमेन में डाल दी गई हैं, जिससे मूल संचालकों का काम सिर्फ सरकारी कार्यों तक सिमट गया है और उन्हें भारी वित्तीय नुकसान हो रहा है.
