दर-दर भटकती पत्नी और खामोश दो जिलों की पुलिस ! नाजिया की पुकार- “मुझे न्याय चाहिए, सहारा नहीं”

Hazaribagh: एक ओर सरकार महिलाओं की सुरक्षा और न्याय की बड़ी-बड़ी बातें करती है, वहीं दूसरी ओर केरेडारी और टंडवा थाना क्षेत्र...

Hazaribagh: एक ओर सरकार महिलाओं की सुरक्षा और न्याय की बड़ी-बड़ी बातें करती है, वहीं दूसरी ओर केरेडारी और टंडवा थाना क्षेत्र से सामने आया एक मामला पुलिस-प्रशासन की संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. छह वर्षों से अपने लापता पति की तलाश में भटक रही नाजिया खातून आज भी न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है. नाजिया का आरोप है कि उसने कई बार केरेडारी थाना और टंडवा थाना में लिखित आवेदन देकर अपने पति आलम अंसारी की खोजबीन और मामले में कार्रवाई की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. इतना ही नहीं, जब वह अपने पति के बारे में जानकारी लेने थाने पहुंचती है तो उसे और उसकी बेटी को अपमानित कर भगा दिया जाता है.

2017 में हुई थी शादी, कुछ वर्षों बाद अचानक लापता हो गया पत

नाजिया खातून मूल रूप से चतरा जिले के टंडवा थाना क्षेत्र अंतर्गत बड़ागांव पंचायत की रहने वाली है. वर्ष 2017 में उसकी शादी हजारीबाग जिले के केरेडारी थाना क्षेत्र स्थित गरीकला पंचायत निवासी आलम अंसारी से सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ हुई थी. महिला का आरोप है कि शादी के बाद पति और ससुराल पक्ष द्वारा उसके साथ मारपीट और प्रताड़ना की जाने लगी. स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उसे कई बार घर से घसीटकर बाहर निकाल दिया गया. इसी बीच लगभग छह वर्ष पहले उसका पति आलम अंसारी रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गया, जिसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल पाया है.

पति गायब, लेकिन महिला पर ही मुसीबतों का पहाड़

नाजिया का कहना है कि पति के लापता होने के बाद उसे सहारा मिलने के बजाय और अधिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी. उसने आरोप लगाया कि उसकी बड़ी गोतनी द्वारा उसे फंसाने के लिए उल्टा मुकदमा दर्ज करा दिया गया, जिसके कारण वह लगातार अदालतों के चक्कर काट रही है. महिला का कहना है कि पति की तलाश तो दूर, अब उसे अपने अधिकार और सम्मान की लड़ाई भी अकेले लड़नी पड़ रही है. नाजिया ने आरोप लगाया कि जब भी वह अपने ससुराल पहुंचती है तो घर पर दोहरा ताला लगा दिया जाता है. ससुराल पक्ष उसे घर में प्रवेश नहीं करने देता और विरोध करने पर मारपीट कर बाहर निकाल दिया जाता है. आज हालत यह है कि छह वर्ष की बेटी के साथ वह कभी किसी रिश्तेदार तो कभी किसी परिचित के घर शरण लेकर जीवन गुजार रही है. उसके पास न स्थायी आवास है और न ही आय का कोई निश्चित साधन.

महिला के अनुसार गांव के गणमान्य लोगों और पंचायत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में कई बार पंचायत भी हुई, लेकिन ससुराल पक्ष ने किसी भी फैसले को स्वीकार नहीं किया. हर बार उसे प्रताड़ित कर घर से निकाल दिया गया.  नाजिया का कहना है कि उसने सामाजिक स्तर पर समझौते और समाधान की हर संभव कोशिश की, लेकिन कहीं से न्याय नहीं मिला.

ALSO READ: कोर्ट की फटकार के बाद JPSC का एक्शन, 22 महीने बाद जारी की फाइनल आंसर-की

 

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *