Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने मोटर वाहन दुर्घटना मुआवजा मामलों में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि कोई यात्री बस चालक के कहने या निर्देश पर बस की छत पर यात्रा कर रहा हो, तो दुर्घटना की स्थिति में केवल इस आधार पर मुआवजा देने से इनकार नहीं किया जा सकता कि उसने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 123(2) का उल्लंघन किया था. मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनाक की पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों में पीड़ित को न्यायसंगत मुआवजा मिलना चाहिए. अदालत ने गिरिडीह के मोटर वाहन दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल (MVACT) द्वारा वर्ष 2013 में निर्धारित 6,41,200 रुपये के मुआवजे को बढ़ाकर 11,13,360 रुपये कर दिया. साथ ही बीमा कंपनी को पहले मुआवजा भुगतान करने और बाद में वाहन मालिक से राशि वसूलने (Pay and recovery) के ट्रिब्यूनल के आदेश को भी बरकरार रखा.
2010 में सड़क दुर्घटना में हुई थी 22 वर्षीय मजदूर की मौत
मामला वर्ष 2010 में गिरिडीह में हुई सड़क दुर्घटना से जुड़ा है. 22 वर्षीय कुशल मजदूर मालचंद मुर्मू टीडीवी बस (संख्या JH-11A-2955) की छत पर सफर कर रहे थे. आरोप था कि चालक ने बस को तेज और लापरवाही से चलाया, जिससे दुर्घटना हुई और मालचंद मुर्मू की मौत हो गई.
हाईकोर्ट ने 6.41 लाख से बढ़ाकर 11.13 लाख किया मुआवजा
इस मामले में मृतक की पत्नी अमिता देवी और अन्य आश्रितों ने मुआवजे की राशि बढ़ाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जबकि बस मालिक के कानूनी वारिसों ने ‘पे एंड रिकवरी’ के आदेश को चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति, मृतक की आय और सुप्रीम कोर्ट के तय सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए मुआवजा बढ़ाया तथा बीमा कंपनी की भुगतान संबंधी जिम्मेदारी को बरकरार रखा.
