हजारीबाग झील रोड पर ‘अमीर’ की गाड़ी और ‘छात्र’ पर पाबंदी? हजारीबाग के ‘नो व्हीकल जोन’ के पीछे का कड़वा सच

Hazaribagh : क्या हजारीबाग का विकास अब शहर के ‘शक्तिशाली’ लोगों के इशारे पर हो रहा है? हजारीबाग झील रोड को ‘नो...

Hazaribagh : क्या हजारीबाग का विकास अब शहर के ‘शक्तिशाली’ लोगों के इशारे पर हो रहा है? हजारीबाग झील रोड को ‘नो व्हीकल जोन’ बनाने की घोषणा ने शहर में एक नई बहस छेड़ दी है. इसे खूबसूरती बढ़ाने का नाम दिया जा रहा है, लेकिन हजारीबाग की जनता अब इसके पीछे की ‘भयावह हकीकत’ पर सवाल उठा रही है. क्या यह फैसला शहर को संवारने के लिए है या आम छात्रों और मध्यम वर्ग को रास्तों से बेदखल करने की कोई सोची-समझझी साजिश?

छात्रों के भविष्य और शिक्षा पर सीधा प्रहार

इस फैसले के खिलाफ अब छात्र संगठन भी सड़कों पर उतर आए हैं. एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष अभिषेक राज कुशवाहा ने इस तुगलकी फरमान का कड़ा विरोध करते हुए इसे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है. एनएसयूआई का साफ कहना है कि झील रोड केवल पर्यटन का केंद्र नहीं, बल्कि हजारीबाग के हजारों विद्यार्थियों की जीवन रेखा है. यदि इस मार्ग को बंद किया गया, तो यूनिवर्सिटी, लॉ कॉलेज, इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज जाने वाले छात्र समय पर अपनी कक्षाओं तक नहीं पहुंच पाएंगे.

वीआईपी संस्कृति और आम जनता का डर

सस्पेंस इस बात का है कि आखिर इस ‘नो व्हीकल जोन’ के घेरे में कौन आएगा और किसे ‘सुरक्षित रास्ता’ मिलेगा? जनता सवाल पूछ रही है कि अगर डिस्ट्रिक्ट जज का आवास, डीआईजी आवास, कमिश्नर आवास, लघु सिंचाई विभाग का दफ्तर और इंदिरा गांधी स्कूल इसी सड़क पर है, तो क्या इन वीआईपी ठिकानों की गाड़ियों पर भी यह नियम लागू होगा? लोगों को डर है कि रसूखदारों की गाड़ियां बेरोकटोक दौड़ेंगी और केवल गरीब छात्रों, शिक्षकों और दोपहिया वाहन चालकों को ही इस ‘नो व्हीकल जोन’ का शिकार बनाया जाएगा. यह कैसा विकास है, जहां कैफेटेरिया का सामान ढोने वाले कर्मचारियों को सड़क पर गाड़ी रोकने के लिए मजबूर किया जाएगा और आम नागरिक को अपनी मोटरसाइकिल खड़ी करने के लिए जगह नहीं मिलेगी?

प्रशासन से व्यावहारिक समाधान की मांग

हम हजारीबाग के विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन ऐसा विकास किसके लिए? यदि झील क्षेत्र को सुंदर बनाना है, तो इसका व्यावहारिक समाधान क्यों नहीं निकाला जा रहा? सुबह और शाम के ‘वॉकिंग आवर्स’ में इसे नो-व्हीकल जोन रखा जा सकता है, लेकिन दिनभर छात्रों का रास्ता रोकना शिक्षा पर सीधा प्रहार है. प्रशासन को इस फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करना होगा.

क्या जागेगा प्रशासन का जमीर?

हजारीबाग की पहचान झील से है, लेकिन इसका भविष्य यहां के उन हजारों विद्यार्थियों से है जो इस शहर की धड़कन हैं. क्या प्रशासन अभिषेक राज कुशवाहा और छात्रों की आवाज सुनकर इस निर्णय को बदलेगा, या फिर हजारीबाग में विकास के नाम पर ‘अमीरों के लिए सड़क’ और ‘छात्रों के लिए संघर्ष’ का दौर जारी रहेगा?

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