दिल्ली की दौड़, रांची में मरोड़: हेमंत का डबल शॉट और कांग्रेस का ‘सेल्फ गोल’, दोनों सीटों पर चुनाव लड़ेगा झामुमो, मंत्री हफीजुल ने कहा- ‘दोनों सीटों पर झामुमो लड़ेगा चुनाव’

Ranchi: राजनीति में टाइमिंग का बड़ा खेल होता है, लेकिन झारखंड कांग्रेस की टाइमिंग इन दिनों शायद राहुकाल में चल रही है....

Ranchi: राजनीति में टाइमिंग का बड़ा खेल होता है, लेकिन झारखंड कांग्रेस की टाइमिंग इन दिनों शायद राहुकाल में चल रही है. राज्यसभा की दो सीटों के लिए चल रहे शह-मात के खेल में कांग्रेस ने सोचा था कि वह गुरुवार की शाम अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के सलाहकार प्रणव झा के नाम का पत्ता फेंककर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ का मास्टरस्ट्रोक खेलेगी. मगर, शुक्रवार की सुबह होते-होते झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने ऐसा काउंटर-स्ट्रोक मारा कि कांग्रेस का यह तथाकथित मास्टरस्ट्रोक, महज एक पॉलिटिकल सुसाइड नोट बनकर रह गया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने न केवल कांग्रेस की इस जल्दबाजी को ठेंगा दिखाया, बल्कि अपनी पार्टी के विधायकों की आपात बैठक बुलाकर साफ कर दिया कि झारखंड में गठबंधन का बॉस कौन है. झामुमो ने दो टूक एलान कर दिया है कि राज्यसभा की दोनों सीटों पर केवल और केवल तीर-कमान (झामुमो) के सिपाही ही उतरेंगे.

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जब सहमति से पहले ही कांग्रेस ने उतार दिया उम्मीदवार

सियासी गलियारों में चर्चा है कि हेमंत सोरेन ने कांग्रेस को साफ-साफ कहा था कि आज, यानी 5 जून को बैठकर ठंडे दिमाग से फैसला करेंगे. लेकिन दिल्ली के गलियारों से आए सलाहकारों को शायद सब्र नहीं था. कांग्रेस ने सोचा कि पहले प्रत्याशी का एलान कर देते हैं, झामुमो मजबूरी में मान ही जाएगा. रात को कांग्रेस ने दांव चला, और आधी रात पार होते-होते झामुमो के विधायकों के फोन घनघनाने लगे. सुबह होते-होते सीएम आवास में स्टीफन मरांडी, नलिन सोरेन, बसंत सोरेन, हफीजुल हसन अंसारी और सुदिव्य कुमार सोनू जैसे दिग्गजों की चौपाल सजी. मंत्रणा हुई, और बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री हफीजुल हसन अंसारी ने बाहर आकर मीडिया के सामने मुस्कुराते हुए कांग्रेस के गुब्बारे की हवा निकाल दी. हफीजुल ने साफ कहा—राय बन चुकी है, दोनों सीटों पर झामुमो लड़ेगा.

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गणित कमजोर, फिर भी रसूख का गुरूर

विधानसभा में कांग्रेस के पास कुल जमा 16 विधायक हैं. राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयता के कम से कम 28 वोटों की दरकार है. यानी कांग्रेस को अपनी लाज बचाने के लिए 12 और विधायकों की उधारी चाहिए. गठबंधन में शामिल राजद के पास 4 और माले के पास 2 विधायक हैं. राजद कोटे के मंत्री किसी भी कीमत पर अपनी कुर्सी दांव पर लगाकर कांग्रेस के ‘अंधेरे सफर’ के हमसफर नहीं बनने वाले. ऐसे में 12 विधायकों का जुगाड़ करना कांग्रेस के लिए वैसा ही है, जैसे मरुस्थल में नाव चलाना.

भाजपा के लिए खुल गया खुला आसमान

गठबंधन की इस सिरफुटौव्वल का सबसे ज्यादा मजा विपक्षी खेमा ले रहा है. विपक्ष (के पास इस समय 24 विधायक हैं (भाजपा के 21, आजसू, जदयू और लोजपा के 1-1). इन्हें जीत के जादुई आंकड़े (28) के लिए सिर्फ 4 विधायकों की ‘सेटिंग करनी है. अब जब झामुमो दोनों सीटों पर लड़ेगा और कांग्रेस अड़ी रहेगी, तो तय मानिए कि मुकाबला द्वितीय वरीयता के वोटों पर जाएगा. और जब बात जोड़-तोड़ और द्वितीय वरीयता की आएगी, तो भाजपा के रणनीतिकार इस बहती गंगा में हाथ धोने से पीछे नहीं हटेंगे. कांग्रेस ने दबाव बनाने के चक्कर में भाजपा के लिए दिल्ली का रास्ता और आसान कर दिया है.

 

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