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हजारीबाग: कोयला मजदूरों के वेतन समझौते पर बढ़ी बेचैनी, यूनियनों ने प्रबंधन को दी चेतावनी

Hazaribagh: हजारीबाग कोयलांचल सहित पूरे कोयला उद्योग में 12वें वेतन समझौते को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. जून माह शुरू...

Hazaribagh: हजारीबाग कोयलांचल सहित पूरे कोयला उद्योग में 12वें वेतन समझौते को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. जून माह शुरू हो चुका है और 1 जुलाई से नए वेतन समझौते की अवधि प्रारंभ होनी है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है. हाल ही में कोलकाता में आयोजित एपेक्स जेसीसी की बैठक से भी मजदूरों और यूनियनों को कोई राहत नहीं मिली.

बैठक में नहीं निकला कोई समाधान

सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान प्रबंधन और यूनियनों के बीच लंबी चर्चा हुई, लेकिन वेतन समझौते को लेकर किसी निष्कर्ष पर सहमति नहीं बन सकी. यूनियनों ने स्पष्ट कहा कि लेबर कोड पर चर्चा अलग विषय है और उसे वेतन समझौते की प्रक्रिया में बाधा नहीं बनाया जाना चाहिए. यूनियन प्रतिनिधियों ने मांग की कि सबसे पहले जेबीसीसीआई-12 का गठन किया जाए और वेतन वार्ता शुरू की जाए. वहीं लेबर कोड से जुड़े मुद्दों पर समानांतर रूप से चर्चा जारी रखी जा सकती है.

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दूसरी पीएसयू में नहीं, फिर कोल इंडिया में ही क्यों देरी?

बैठक के दौरान यूनियन नेताओं ने प्रबंधन से सवाल किया कि देश की अन्य सार्वजनिक उपक्रम कंपनियों में लेबर कोड को लेकर इतनी अनिश्चितता नहीं है, तो फिर कोल इंडिया प्रबंधन वेतन समझौते को लेकर इतनी देरी क्यों कर रहा है. यूनियनों का कहना है कि मजदूरों के हितों से जुड़े वेतन समझौते को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. उनका तर्क है कि तकनीकी और कानूनी स्तर पर ऐसी कोई बाधा नहीं है, जो जेबीसीसीआई-12 के गठन को रोक सके.

मामले पर कोयला मंत्रालय से की जाएगी बातचीत

सूत्रों के मुताबिक, प्रबंधन की ओर से यूनियनों को कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया. हालांकि यह जरूर कहा गया कि इस विषय पर कोयला मंत्रालय से बातचीत की जाएगी. लेकिन यूनियन नेताओं का मानना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा और जल्द निर्णय आवश्यक है.

यूनियनों की चेतावनी

बैठक में शामिल चारों केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने प्रबंधन को साफ संदेश दिया कि यदि औद्योगिक संबंधों को बेहतर बनाए रखना है, तो जल्द से जल्द जेबीसीसीआई-12 का गठन किया जाए. यूनियनों ने संकेत दिया कि यदि देरी जारी रही तो वे आंदोलनात्मक कदम उठा सकते हैं.

प्रबंधन ने गिनाईं उद्योग की चुनौतियां

बैठक के दौरान कोल इंडिया प्रबंधन ने उद्योग के सामने मौजूद चुनौतियों का भी जिक्र किया. अधिकारियों ने कहा कि निजी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और कोल इंडिया के कोयले की मांग में भी कमी देखी जा रही है. ऐसे में यूनियनों से सहयोग की अपेक्षा की गई ताकि कंपनी को प्रतिस्पर्धी माहौल में मजबूत बनाया जा सके.

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मजदूरों की नजर अगले फैसले पर

कोयला वेतन समझौता-11 की अवधि समाप्ति के करीब है और 1 जुलाई से नए समझौते का समय शुरू होने जा रहा है. ऐसे में हजारीबाग कोयलांचल सहित लाखों कोयला कर्मियों की निगाहें अब जेबीसीसीआई-12 के गठन और वेतन वार्ता की शुरुआत पर टिकी हैं. यदि जल्द कोई निर्णय नहीं होता है तो कोयला क्षेत्रों में असंतोष बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

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