Ranchi: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव ने प्रदेश की राजनीति में गठबंधन के भीतर छिपी महत्वाकांक्षाओं और शह-मात के खेल को सतह पर ला दिया है. झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) द्वारा अपने उम्मीदवार की घोषणा किए जाने के तुरंत बाद, झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के. राजू का यह बयान कि एक सीट कांग्रेस जीतेगी और एक जेएमएम के खाते में जाएगी. इस राजनीतिक रस्साकशी को सुलझाने के लिए कांग्रेस के शीर्ष पर्यवेक्षक भूपेश बघेल और अजय शर्मा का अचानक रांची पहुंचना इस बात का संकेत है कि मामला केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है.

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कई मायने हैं के. राजू के बयान के
कांग्रेस के दिग्गज नेताओं का रांची पहुंचना मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर एक मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना है, ताकि जेएमएम दोनों सीटों पर दावा न ठोक सके. आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए दोनों ही दल जनता को एकजुटता का संदेश देना चाहते हैं. के. राजू का यह कहना कि गठबंधन मजबूत है. पर्यवेक्षकों और प्रभारी की मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से होने वाली मुलाकात महज शिष्टाचार नहीं, बल्कि सीटों के गणित और दोनों दलों के विधायकों के प्रथम वरीयता के वोटों को सुरक्षित करने की एक गंभीर बिसात है.
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