अमित वर्मा
Lohardaga: कुड़ू प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए गए आरसीसी बेंच अधिष्ठापन कार्य में भारी अनियमितता और सरकारी राशि के बंदरबांट का मामला सामने आया है. आरोप है कि पंचायत प्रतिनिधियों और पंचायत सचिवों की मिलीभगत से सरकारी गाइडलाइन को दरकिनार कर मनमाने तरीके से आरसीसी बेंच की खरीद और अधिष्ठापन कराया गया, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ. जानकारी के अनुसार, प्रखंड की अलग-अलग पंचायतों में एक ही प्रकार के आरसीसी बेंच के लिए अलग-अलग राशि का भुगतान किया गया. कहीं प्रति बेंच सात हजार रुपये तो कहीं दस हजार रुपये तक भुगतान किया गया है. जबकि स्थानीय बाजार में लगभग पांच फीट लंबाई और चौड़ाई वाले आरसीसी बेंच की कीमत करीब तीन हजार रुपये बताई जा रही है. ऐसे में एक ही सामग्री के लिए अलग-अलग भुगतान कई सवाल खड़े कर रहा है.

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नियमों की अनदेखी
बताया जा रहा है कि 15वें वित्त आयोग की राशि खर्च करने के लिए सरकार द्वारा स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं. इसके तहत वार्षिक कार्य योजना में पारित योजनाओं को ग्राम सभा के माध्यम से चयनित लाभुक समिति द्वारा संचालित किया जाना चाहिए. साथ ही अभियंताओं के प्राक्कलन और मापी पुस्तिका के आधार पर ही सरकारी राशि खर्च करने का प्रावधान है. लेकिन कुड़ू प्रखंड के कई पंचायतों में इन नियमों को नजरअंदाज करते हुए आरसीसी बेंच खरीद की योजना को ऑनलाइन मोड में जोड़कर चहेते वेंडरों को काम सौंप दिया गया.
कार्य आवंटन में पारदर्शिता नहीं, बेंच में पड़ी दरार
आरोप यह भी है कि कार्य आवंटन में पारदर्शिता नहीं बरती गई. योजना के अनुसार एक यूनिट में 10 से 15 बेंच लगाने का प्रावधान है, लेकिन कई जगहों पर केवल 10 या 12 बेंच ही लगाए गए हैं. इसके बावजूद राशि का भुगतान अधिक दिखाया गया. स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी मानकों का पालन नहीं किया गया और कार्य की गुणवत्ता भी बेहद खराब है. कई स्थानों पर लगाए गए बेंचों में महज पांच महीने के भीतर ही दरारें पड़ने लगी हैं, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. लोगों का आरोप है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो सरकारी राशि के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग और घोटाले का खुलासा हो सकता है.

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पदाधिकारी दे रहे जांच का भरोसा
मामले को लेकर नाम न छापने की शर्त पर एक अभियंता ने बताया कि आरसीसी बेंच अधिष्ठापन के लिए न तो किसी प्रकार का प्राक्कलन तैयार किया गया और न ही खर्च की गई राशि की मापी पुस्तिका बनाई गई है. ऐसे में प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है. इधर, प्रभारी बीडीओ सह सीओ संतोष उरांव ने मामले की जानकारी नहीं होने की बात कही. उन्होंने कहा कि यदि एक ही प्रकार के आरसीसी बेंच की खरीद में अलग-अलग राशि का भुगतान किया गया है तो यह गलत है. मामले की जांच कराई जाएगी तथा आवश्यक कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन को पत्र भेजा जाएगा.
