हजारीबाग: ट्रैक्टर के पहियों तले रौंदी गई विरासत, ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व वाले स्थल से छेड़छाड़ पर बढ़ा जनाक्रोश

Hazaribagh : शहर की साझा सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक सौहार्द के प्रतीक माने जाने वाले ऐतिहासिक छड़वा मोहर्रम मेला टांड़ के साथ...

Hazaribagh : शहर की साझा सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक सौहार्द के प्रतीक माने जाने वाले ऐतिहासिक छड़वा मोहर्रम मेला टांड़ के साथ कथित छेड़छाड़ की घटना ने लोगों में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है. आरोप है कि असामाजिक तत्वों ने ट्रैक्टर चलाकर मेला टांड़ की जमीन को जोत दिया, जिससे न केवल स्थल की मूल संरचना प्रभावित हुई, बल्कि लोगों की धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंची है. घटना सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समुदायों के लोगों ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने अपर समाहर्ता को सौंपा ज्ञापन

मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व सदर विधानसभा प्रत्याशी एवं कांग्रेस नेता रजी अहमद के नेतृत्व में कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल अपर समाहर्ता, हजारीबाग से मिला और उन्हें ज्ञापन सौंपा. प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला अध्यक्ष साजिद खान, जमशेद खान, तनवीर अहमद सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल थे. उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की.

मेला टांड़ की सुरक्षा सुनिश्चित करने की उठी मांग

ज्ञापन के माध्यम से प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से आग्रह किया कि छड़वा मोहर्रम मेला टांड़ की भूमि को अतिक्रमण और किसी भी प्रकार की क्षति से सुरक्षित रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं. साथ ही भविष्य में किसी भी धार्मिक, सांस्कृतिक और सार्वजनिक स्थल के साथ इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि ऐसे ऐतिहासिक स्थलों की उपेक्षा या क्षति समाज में अनावश्यक तनाव पैदा कर सकती है, इसलिए समय रहते उचित कार्रवाई आवश्यक है.

साझा संस्कृति और भाईचारे का प्रतीक है छड़वा मोहर्रम मेला टांड़

कांग्रेस नेताओं और स्थानीय लोगों ने कहा कि छड़वा मोहर्रम मेला टांड़ केवल एक मैदान नहीं है, बल्कि यह हजारीबाग की साझा सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक एकता का प्रतीक है. वर्षों से यह स्थल विभिन्न समुदायों के बीच भाईचारे और सौहार्द का संदेश देता आया है. ऐसे में इस स्थल के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को केवल भूमि से जुड़ा मामला नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक विरासत और सामाजिक मूल्यों पर चोट के रूप में देखा जा रहा है.

ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर उठे सवाल

घटना के बाद शहर में यह बहस भी तेज हो गई है कि जिले के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी और संरक्षण के उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में अन्य महत्वपूर्ण स्थल भी ऐसे कृत्यों का शिकार हो सकते हैं. लोगों ने प्रशासन से मामले में शीघ्र कार्रवाई करते हुए दोषियों को दंडित करने तथा जिले के सभी महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा के लिए विशेष योजना बनाने की मांग की है.

त्वरित कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से अपेक्षा जताई है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े स्थलों को नुकसान पहुंचाने का साहस न कर सके. साथ ही छड़वा मोहर्रम मेला टांड़ की गरिमा और ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित रखने के लिए स्थायी सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं.

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