हजारीबाग: फ्लोटिंग सोलर प्लांट के खिलाफ विस्थापितों का शक्ति प्रदर्शन

Hazaribagh: कोनार डैम क्षेत्र में प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट के विरोध और विस्थापित रैयतों की लंबित मांगों को लेकर सोमवार को...

Hazaribagh: कोनार डैम क्षेत्र में प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट के विरोध और विस्थापित रैयतों की लंबित मांगों को लेकर सोमवार को आदिवासी विस्थापित संघर्ष मोर्चा के बैनर तले डीवीसी कोनार परियोजना कार्यालय के समक्ष एकदिवसीय आक्रोशपूर्ण धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया. इस दौरान सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष, युवा और बुजुर्ग आंदोलन में शामिल हुए तथा अपने अधिकारों और जमीन की रक्षा को लेकर जोरदार आवाज बुलंद की.

DVC कार्यालय तक निकाली गई विशाल रैली

धरना से पूर्व कोनार डैम चौक से डीवीसी कार्यालय तक विशाल रैली निकाली गई. पारंपरिक वेशभूषा में शामिल आंदोलनकारियों ने ढोल-नगाड़ों की थाप और पारंपरिक हथियारों के साथ मार्च किया. पूरे रास्ते “जमीन हमारी, हक हमारा”, “जमीन हमारी, राज तुम्हारा नहीं चलेगा” तथा “विस्थापितों के अधिकारों पर हमला बंद करो” जैसे नारों से क्षेत्र गूंजता रहा. रैली ने आंदोलन की एकजुटता और शक्ति का प्रदर्शन किया.

विस्थापितों की अनदेखी का आरोप

धरना को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि कोनार डैम निर्माण के लिए दशकों पहले हजारों परिवारों ने अपनी जमीन देश और विकास के नाम पर सौंप दी थी, लेकिन आज तक उन्हें न तो समुचित पुनर्वास मिला और न ही रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिला. अब उसी क्षेत्र में फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट स्थापित करने की तैयारी की जा रही है, जबकि विस्थापित परिवारों की समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं.

त्रिपक्षीय वार्ता और मुआवजे की मांग

आंदोलनकारियों ने मांग की कि सोलर पावर प्लांट निर्माण से पहले विस्थापितों के साथ त्रिपक्षीय वार्ता कर उनकी सभी समस्याओं का समाधान किया जाए. साथ ही जमीन के बदले जमीन, उचित मुआवजा, विस्थापन प्रमाण पत्र, मालिकाना हक और स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता सुनिश्चित की जाए.

उन्होंने यह भी मांग रखी कि जिस भूमि पर सोलर परियोजना स्थापित की जा रही है, उससे होने वाले बिजली उत्पादन के लाभ में विस्थापित परिवारों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए और इसके लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए.

कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने का आरोप

धरना-प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने आरोप लगाया कि विकास परियोजनाओं के नाम पर कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाया जा रहा है, जबकि विस्थापित परिवार अपने अधिकारों के लिए आज भी संघर्ष करने को मजबूर हैं. वक्ताओं ने कहा कि 75 वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद प्रभावित गांवों के लोग रोजगार, शिक्षा, सड़क, बिजली और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं.

उन्होंने कहा कि यह स्थिति अब स्वीकार्य नहीं है और यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक एवं तीव्र किया जाएगा.

डीवीसी अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन

धरना के दौरान भाकपा माले के राज्य कमेटी सदस्य भुवनेश्वर केवट, संथाली समाज के नेता सोहराय मांझी, राज्य कमेटी सदस्य आरडी मांझी, जिला सचिव पच्चू राणा तथा विस्थापित मोर्चा के बोकारो जिलाध्यक्ष बालेश्वर यादव सहित कई नेताओं ने डीवीसी अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए विस्थापितों की समस्याओं के समाधान की मांग की.

कई नेताओं ने किया संबोधित

सभा को मेहिलाल बेसरा, घनश्याम पाठक, बिसुन हेम्ब्रम, रूपा बेसरा, लोकनाथ महतो, हेमलाल महतो, भुवनेश्वर महतो, वासुदेव मंडल और दुलारचंद प्रसाद साव समेत कई वक्ताओं ने संबोधित किया. कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में विस्थापित परिवारों के सदस्य उपस्थित रहे.

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

धरना-प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर विष्णुगढ़ थाना पुलिस एवं अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी. पूरे कार्यक्रम के दौरान स्थिति शांतिपूर्ण बनी रही.

विस्थापितों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा. उनका कहना था कि यह लड़ाई केवल जमीन की नहीं, बल्कि अधिकार, सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है.

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