Ranchi : अपनी पहचान, अपनी संस्कृति और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष ही सबसे बड़ी शक्ति है. उक्त बातें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के शहादत दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कही. रांची स्थित समाधि स्थल पर पुष्प अर्पित करने के बाद मुख्यमंत्री ने भगवान बिरसा के विचारों को राज्य के विकास का मूल मंत्र बताया. सीएम ने एक नए विजन के साथ उलगुलान की प्रासंगिकता को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि धरती आबा ने जल, जंगल, जमीन, स्वाभिमान और आदिवासी मूलवासी अस्मिता की रक्षा के लिए अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया था.
न्याय की लड़ाई का सबसे बड़ा आधार
उनका यह संघर्ष आज के दौर में भी सामाजिक न्याय की लड़ाई का सबसे बड़ा आधार है. उलगुलान की चेतना, संघर्ष की मशाल और जन-जन के स्वाभिमान के प्रतीक भगवान बिरसा मुंडा का जीवन और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा. उनके आदर्श और सपने झारखंड सरकार के लिए मार्गदर्शक हैं. राज्य सरकार धरती आबा के सपनों का झारखंड बनाने और जनकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

