कोयला कंपनी के खिलाफ धरना जारी, विस्थापितों ने कहा – भूमि अधिग्रहण नहीं हुआ तो खनन कैसे शुरू हुआ

Pakur : पचुवाड़ा कोयला खदान विस्थापित मोर्चा के बैनर तले विस्थापितों का धरना प्रदर्शन पांचवें दिन भी जारी रहा. विस्थापित पचुवाड़ा मध्य...

Pakur : पचुवाड़ा कोयला खदान विस्थापित मोर्चा के बैनर तले विस्थापितों का धरना प्रदर्शन पांचवें दिन भी जारी रहा. विस्थापित पचुवाड़ा मध्य व उत्तर कोल ब्लॉक के है. वहीं धरना प्रदर्शन डीसी कार्यालय के समक्ष किया जा रहा है. आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मोहन मुर्मू और मुन्नी हांसदा ने जिला प्रशासन सहित खनन कंपनियों पीएसपीसीएल और डब्लूबीपीडीसीएल के खिलाफ तीखा आक्रोश व्यक्त किया. बड़ी संख्या में जुटे ग्रामीणों और महिलाओं के तीखे तेवरों को देखते हुए समाहरणालय परिसर में पुलिस बल को अलर्ट मोड पर रखा गया है.

कागजों में नहीं हुआ भूमि अधिग्रहण, फिर भी चल रहा खनन : मुन्नी हांसदा

धरना को संबोधित करते हुए आदिवासी कल्याण परिषद की सचिव मुन्नी हांसदा ने सूचना के अधिकार से मिले दस्तावेजों का हवाला देते हुए जिला प्रशासन और कंपनियों के गठजोड़ पर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि जिला भू-अर्जन कार्यालय के अनुसार, पाकुड़ में इन कंपनियों के लिए भू-अर्जन अधिनियम 2013 के तहत किसी भूमि का अर्जन ही नहीं किया गया है. नियमत कोयला खनन के लिए भूमि का अधिग्रहण भारत सरकार के कोल बेयरिंग एक्ट के तहत होना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी वैध कानूनी प्रक्रिया के ही कठालडीह, चिलगो, बीसनपुर और पचुवाड़ा में आदिवासियों की निजी जमीनों से अवैध रूप से कोयला निकाला जा रहा है.

 

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