Ranchi : झारखंड हाई कोर्ट ने सड़क सुरक्षा को लेकर दायर मिथुन कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है. प्रार्थी की ओर से राज्य सरकार के ही आंकड़े को प्रस्तुत करते हुए बताया कि राज्य में 35,367 ऐसे वाहन है जिनके रजिस्ट्रेशन नंबर एक जैसे हैं. ऐसे में इस लापरवाही के कारण कई दुर्घटनाएं एवं अपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है. इसके अलावा बस के मोडिफिकेशन को लेकर भी अदालत को यह जानकारी दी गई की सामान्य बसों का मोडिफिकेशन कर सुरक्षा मानकों से खिलवाड़ किया जा रहा है. टैक्स बचाने के लिए नन एसी बस को बस में कन्वर्ट किया जा रहा है. इसमें सबसे ज्यादा खतरा स्कूली बच्चों को है. जहां स्कूल बस मोडिफिकेशन की वजह से पूरी तरह से पैक हो जाते हैं. इसके अलावा राज्य में चालकों के लिए जारी किए गए लाइसेंस निर्गत किए जाने की प्रक्रिया बेहद लचीला है.
बड़ी संख्या में फर्जी लाइसेंस का इस्तेमाल
प्राथी के अनुसार मोटर व्हीकल एक्ट 2013 के अनुसार मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर के जांच के बाद ही लाइसेंस निर्गत किया जाना चाहिए. लेकिन इसकी जगह कनीय दर्जे के कर्मियों के द्वारा लाइसेंस निर्गत करने की प्रक्रिया पूरी की जाती है. जिससे खतरा और बढ़ जाता है. लाइसेंस निर्गत करने के पूर्व उसकी जांच स्टाफ लेवल कर्मी करते है. प्राथी ने कहा है कि राज्य में बड़ी संख्या में फर्जी लाइसेंस का इस्तेमाल किया जा रहा है. प्रार्थी के अधिवक्ता के दलील को सुनते हुए अदालत ने परिवहन सचिव से 10 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एस एम सोनक एवं न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ कर रही है.

