Hazaribagh: सदर अंचल कार्यालय इन दिनों भ्रष्टाचार और मनमानी के गंभीर आरोपों के घेरे में आ गया है. स्थानीय रैयतों और जमीन खरीदारों द्वारा सदर अंचल अधिकारी और अंचल निरीक्षक की कार्यप्रणाली पर बेहद संगीन सवाल उठाए जा रहे हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अंचल में दाखिल-खारिज और भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र के नाम पर एक बड़ा कथित सिंडिकेट काम कर रहा है. हैरान करने वाली बात यह है कि हल्के के राजस्व उपनिरीक्षक द्वारा तमाम जमीनी कागजात और केवाला सही पाए जाने और अपनी पॉजिटिव रिपोर्ट सौंपने के बावजूद, अंचल निरीक्षक और अंचल अधिकारी के स्तर पर आकर केवाले को गलत बताते हुए म्यूटेशन के आवेदनों को धड़ल्ले से अस्वीकृत किया जा रहा है. पीड़ितों का आरोप है कि इस पूरी अड़ंगेबाजी के पीछे कथित रूप से 20 हजार रुपये तक की मोटी रकम की मांग की जा रही है, और जो रैयत यह मांग पूरी नहीं कर पाते, उनके वैध कागजातों को भी खारिज कर दिया जाता है.
बिना कोर्ट ऑर्डर रिजेक्टेड केस को दोबारा पास करने का खेल
सदर अंचल की मनमानी का आलम यह है कि पीड़ित रैयतों द्वारा न्याय की उम्मीद में, जब भूमि सुधार उपसमाहर्ता सदर हजारीबाग के न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाता है, तो वहां भी उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. बताया जाता है कि एलआरडीसी कोर्ट में सुनवाई के बाद जब अंचल अधिकारी से रिपोर्ट मांगी जाती है, तो अंचल की ओर से वहां सकारात्मक रिपोर्ट भेज दी जाती है. लेकिन जैसे ही एलआरडीसी कोर्ट से रैयत के पक्ष में आदेश आता है, अंचल कार्यालय के आला अधिकारी उच्च न्यायालय और वरीय अधिकारियों के उन आदेशों को भी कथित रूप से मानने से साफ इनकार कर देते हैं. पीड़ितों का दावा है कि अंचल कार्यालय में यह कहकर आवेदनों को लटकाया जाता है कि “कोई जजमेंट नहीं आया है”. इससे भी बड़ा चौंकाने वाला आरोप यह है कि जिस केस को एक बार रिजेक्ट कर दिया जाता है, कथित रूप से पर्दे के पीछे से सांठगांठ होने के बाद उसी रिजेक्टेड केस को बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश के दोबारा लॉगिन करके स्वीकृत कर दिया जाता है.

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