बुंडू में 18 पहियों वाले रथ पर सावर हैं सूर्य देव, पढ़िए सूर्य मंदिर में क्या है खास

Newsdesk: रांची से लगभग 40 किलोमीटर दूर बुंडू प्रखंड में स्थित सूर्य मंदिर झारखंड के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थलों में...

Newsdesk: रांची से लगभग 40 किलोमीटर दूर बुंडू प्रखंड में स्थित सूर्य मंदिर झारखंड के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थलों में से एक है. अपनी अनूठी रथनुमा संरचना के कारण यह मंदिर देशभर में विशेष पहचान रखता है. दूर से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है मानो भगवान सूर्य सात घोड़ों वाले दिव्य रथ पर विराजमान हों. यही आकर्षक बनावट हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है.

 

रथ की आकृति में छिपी है अद्भुत वास्तुकला

सूर्य मंदिर का निर्माण पूरी तरह प्रतीकात्मक और वैज्ञानिक सोच को ध्यान में रखकर किया गया है. मंदिर को विशाल रथ के रूप में तैयार किया गया है, जिसमें 18 बड़े पहिए बनाए गए हैं. इन पहियों को समय और जीवन चक्र का प्रतीक माना जाता है. मंदिर के आगे सात घोड़े निर्मित हैं, जो सूर्य देव के रथ का प्रतिनिधित्व करते हैं. मंदिर की संरचना में 27 खिड़कियां बनाई गई हैं, जिन्हें 27 नक्षत्रों से जोड़कर देखा जाता है. वहीं तीन प्रमुख गुंबद इसकी धार्मिक और स्थापत्य विशेषताओं को और भी आकर्षक बनाते हैं. पूरे मंदिर के निर्माण में गणितीय संतुलन, ज्यामितीय अनुपात और धार्मिक प्रतीकों का विशेष ध्यान रखा गया है.

कोणार्क की झलक, लेकिन अपनी अलग पहचान

विशेषज्ञों का मानना है कि मंदिर की वास्तुकला पर ओडिशा के प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर की छाप दिखाई देती है. हालांकि बुंडू का सूर्य मंदिर अपनी अलग शैली, स्थानीय निर्माण कला और आधुनिक स्थापत्य के कारण विशिष्ट पहचान रखता है. यही वजह है कि यह मंदिर झारखंड की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है.

भगवान सूर्य को समर्पित आस्था का केंद्र

मंदिर भगवान सूर्य को समर्पित है और यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. रविवार, मकर संक्रांति और विशेष रूप से छठ महापर्व के दौरान यहां श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ता है. लोगों की मान्यता है कि सूर्य देव की आराधना से स्वास्थ्य, ऊर्जा, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है.

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छठ पर्व पर श्रद्धालुओं से भर जाता है परिसर

मंदिर परिसर में स्थित विशाल जलाशय छठ पर्व के दौरान विशेष आकर्षण का केंद्र बन जाता है. हजारों श्रद्धालु यहां उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं. इस दौरान मंदिर परिसर पूरी तरह भक्ति, श्रद्धा और उत्सव के रंग में रंग जाता है. झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.

प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन का प्रमुख केंद्र

मंदिर के चारों ओर फैली हरियाली, शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता इसे पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद खास बनाती है. धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह स्थान फोटोग्राफी, पिकनिक और पारिवारिक भ्रमण के लिए भी लोकप्रिय है. वर्षभर यहां पर्यटकों की आवाजाही बनी रहती है.

झारखंड की सांस्कृतिक विरासत का गौरव

सूर्य मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि झारखंड की स्थापत्य कला, सांस्कृतिक परंपरा और वैज्ञानिक सोच का उत्कृष्ट उदाहरण भी है. रथ के आकार में निर्मित इसकी भव्य संरचना, गणितीय संतुलन और धार्मिक महत्व इसे राज्य के सबसे महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थलों में शामिल करते हैं. आज यह मंदिर आस्था, कला और वास्तुकला के अद्भुत संगम के रूप में झारखंड की पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है.

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