Dheeraj Kumar
Ranchi: झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन में करीब साठ हजार से अधिक संख्या में सदस्य हैं. सभी सदस्यों की सैलरी अकाउंट से दस रूपये की चंदे के रूप में कटौती होती है. इस कटौती के अनुसार प्रतिमाह झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन को प्रतिमाह छह लाख से अधिक चंदे के रूप में राशि प्राप्त हो रहे हैं. वहीं झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन के सदस्य का कहना है कि चंदा तो लिया जाता है लेकिन जमीनी स्तर पर काम नहीं दिखता है. केंद्रीय नेतृत्व के खिलाफ पुलिस कर्मियों और हवलदारों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है. इस संगठन को छह लाख रुपये से अधिक भारी-भरकम राशि मिल रही है. इसके बावजूद जमीनी स्तर के पुलिस कर्मियों की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. पुलिस कर्मियों का आरोप है कि एसोसिएशन के अध्यक्ष और उनके पदाधिकारी उनके हितों के लिए आवाज उठाने में पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं. यह निष्क्रियता अब वर्तमान अध्यक्ष के खिलाफ एक बड़े विरोध का कारण बन रही है.

अब तक पुलिस कर्मियों के कल्याण के लिए नहीं उठा कोई ठोस कदम
एसोसिएशन को मिलने वाले कुल चंदे का चालीस प्रतिशत हिस्सा केंद्रीय कार्यालय रांची अपने पास सुरक्षित रखता है. शेष साठ प्रतिशत राशि को अन्य जिलों की स्थानीय इकाइयों में वितरित किया जाता है. इस बड़े वित्तीय बजट के बाद भी पुलिस कर्मियों के कल्याण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं. निचले स्तर के कर्मियों का कहना है कि उनके हक की गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा सिर्फ दफ्तर चलाने और केंद्रीय पदाधिकारियों की सुख-सुविधाओं में खर्च हो रहा है.
समस्याओं पर चुप्पी से बढ़ा आक्रोश
इस संगठन से जुड़े सदस्य लंबे समय से कई बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं. इनमें समय पर प्रोन्नति न मिलना, आवास की खराब स्थिति, अत्यधिक ड्यूटी के घंटे और चिकित्सीय सुविधाओं की कमी शामिल है. नियमानुसार एसोसिएशन का मुख्य कार्य इन मुद्दों को सरकार और पुलिस मुख्यालय के समक्ष मजबूती से उठाना है.
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नेतृत्व परिवर्तन की उठने लगी मांग
राज्य के विभिन्न जिलों में पुलिस मेंस एसोसिएशन के भीतर ही दरारें दिखने लगी हैं. कई जिला इकाइयों के सदस्यों ने दबी जुबान में वर्तमान नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. पुलिस कर्मियों का कहना है कि जो संगठन उनकी आवाज नहीं बन सकता, उसे लाखों रुपये का चंदा देने का कोई औचित्य नहीं है. यदि केंद्रीय कार्यालय ने जल्द ही अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया और जवानों के मुद्दों पर आंदोलन का रुख नहीं अपनाया, तो आने वाले दिनों में एसोसिएशन के भीतर एक बड़ा विद्रोह देखने को मिल सकता है. सदस्य अब सामूहिक रूप से नेतृत्व परिवर्तन की रणनीति बनाने में जुट गए हैं.
झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन के अध्यक्ष का बयान
इस मामले को लेकर झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन के अध्यक्ष कर्ण सिंह ने बताया कि अपने संगठन के सदस्यों को आवाज को बुलंद कर रहे हैं. उनकी मांगों को सरकार के मंत्री से मिलकर अवगत करा रहे हैं. वहीं इनका जो भी काम रुका है, उनको जल्द ही पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है.
