Newsdesk: हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड स्थित बादाम गांव में मौजूद ऐतिहासिक बादाम किला कभी रामगढ़ राज की सत्ता, समृद्धि और शौर्य का प्रतीक हुआ करता था. आज यह किला अपनी जर्जर दीवारों और टूटती संरचनाओं के साथ इतिहास की एक अनमोल धरोहर के रूप में खड़ा है. संरक्षण के अभाव में यह ऐतिहासिक विरासत धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होती जा रही है.

राजा हेमंत नारायण सिंह ने कराया था निर्माण

इतिहासकारों के मुताबिक बादाम किले का निर्माण रामगढ़ राज्य के छठे शासक राजा हेमंत नारायण सिंह ने वर्ष 1642 में कराया था. उन्होंने लगभग 57 वर्षों तक रामगढ़ राज्य पर शासन किया. बताया जाता है कि उनके शासनकाल में बादाम, रुद्दी और माधैयाढाब में तीन किलों का निर्माण कराया गया था. इनमें बादाम नदी के किनारे स्थित यह किला सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण माना जाता था.

पटनिया ईंटों और पारंपरिक तकनीक से बना था किला

इस किले के निर्माण में उस समय की उन्नत निर्माण तकनीकों का उपयोग किया गया था. कहा जाता है कि पटना से विशेष कारीगर बुलाए गए थे, जिन्होंने पटनिया ईंट, सुर्खी, चूना, गुड़ और उड़द दाल जैसे पारंपरिक मिश्रणों का उपयोग कर इसकी मजबूत संरचना तैयार की थी. यही कारण है कि सैकड़ों वर्ष बीत जाने के बाद भी इसके कई हिस्से आज तक मौजूद हैं.
सिंह दरवाजा आज भी सुनाता है वैभव की कहानी

किले का मुख्य प्रवेश द्वार, जिसे सिंह दरवाजा कहा जाता है, आज भी किसी तरह अपनी पहचान बचाए हुए है. हालांकि यह अब काफी जर्जर हो चुका है, लेकिन इसकी विशालता और निर्माण शैली उस दौर की भव्यता का एहसास कराती है. किले के अवशेष आज भी रामगढ़ राज के गौरवशाली इतिहास की गवाही देते हैं.
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राजा का लगाया गुलाब आज भी है जीवित

बादाम किले से जुड़ी एक दिलचस्प और भावनात्मक कहानी भी प्रचलित है. स्थानीय लोगों के अनुसार किले परिसर में राजा हेमंत नारायण सिंह द्वारा लगाया गया गुलाब का पौधा आज भी हरा-भरा है. जहां एक ओर किले की दीवारें टूट रही हैं, वहीं यह गुलाब इतिहास की यादों को जीवित रखे हुए है. यह पौधा आज भी यहां आने वाले लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
उपेक्षा के कारण मिटता जा रहा अस्तित्व

कभी राजसी गतिविधियों से गुलजार रहने वाला यह किला आज उपेक्षा का शिकार है. उचित देखरेख और संरक्षण के अभाव में इसकी दीवारें लगातार क्षतिग्रस्त हो रही हैं. कई हिस्से पूरी तरह ढह चुके हैं, जबकि शेष संरचनाएं भी धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते संरक्षण का कार्य नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में यह ऐतिहासिक धरोहर पूरी तरह समाप्त हो सकती है.
पर्यटन और विरासत संरक्षण की अपार संभावनाएं

इतिहास, संस्कृति और स्थापत्य कला के दृष्टिकोण से बादाम किला अत्यंत महत्वपूर्ण है. अगर इसके संरक्षण, सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाएं, तो यह झारखंड के प्रमुख ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है. इससे न केवल राज्य की विरासत सुरक्षित होगी, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार और आर्थिक लाभ भी मिल सकेगा.
आने वाली पीढ़ियों के लिए बचानी होगी यह धरोहर

बादाम किला केवल ईंट-पत्थरों से बनी एक पुरानी संरचना नहीं है, बल्कि यह झारखंड और रामगढ़ राज के गौरवशाली इतिहास का जीवंत दस्तावेज है. इसकी टूटी दीवारें बीते वैभव की कहानी कहती हैं और संरक्षण की मांग करती हैं. आज आवश्यकता है कि सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर इस ऐतिहासिक विरासत को बचाने की दिशा में ठोस कदम उठाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपने इतिहास से जुड़ सकें.
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