Chakradharpur: भारत सरकार के महत्वाकांक्षी ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ को गति देने के उद्देश्य से गुरुवार को मनोहरपुर प्रखंड मुख्यालय सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला का उद्देश्य टीबी उन्मूलन अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाना तथा आम लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना था. कार्यक्रम में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) शक्तिकुंज, अंचल अधिकारी (सीओ) प्रदीप कुमार, उपप्रमुख गोडविन एक्का, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अनिल कुमार, पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. एस. घोलटकर, बीपीएम अनुज कुमार सिंह, आशीष कुमार सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, आंगनबाड़ी सेविकाएं, साहिया साथी, एएनएम, एमपीडब्ल्यू एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित रहे.
स्वास्थ्य अधिकारियों ने दी टीबी से जुड़ी विस्तृत जानकारी
कार्यशाला के दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों ने टीबी के लक्षण, जांच, उपचार एवं रोकथाम के उपायों की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा पूरे देश में ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत वर्ष 2030 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. अधिकारियों ने कहा कि टीबी एक गंभीर लेकिन पूर्णतः उपचार योग्य बीमारी है. समय पर जांच और नियमित दवा सेवन से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं. इसके लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाने तथा लक्षण दिखाई देने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने के लिए प्रेरित करना आवश्यक है.

मरीजों के बीच वितरित की गई फूड बास्केट किट
कार्यक्रम में आंगनबाड़ी सेविकाओं, सहिया साथियों और स्वास्थ्य कर्मियों से अपील की गई, कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में घर-घर जाकर लोगों को टीबी के प्रति जागरूक करें तथा संदिग्ध मरीजों की पहचान कर उन्हें जांच के लिए प्रेरित करें. इस अवसर पर नि-क्षय मित्र पहल के तहत अधिकारियों द्वारा गोद लिए गए 81 टीबी मरीजों में से 53 मरीजों को फूड बास्केट किट वितरित की गई. बताया गया कि लाभुकों को यह पोषण सहायता किट लगातार छह माह तक उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि उपचार के दौरान उन्हें आवश्यक पोषण मिल सके.
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने टीबी उन्मूलन अभियान को सफल बनाने और अपने क्षेत्र को टीबी मुक्त बनाने का संकल्प लिया. साथ ही समाज को नशामुक्त बनाने के उद्देश्य से सभी उपस्थित लोगों को नशा मुक्ति की शपथ भी दिलाई गई.
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