सिमडेगा: विशाल सनातनी समागम सम्मेलन में संस्कृति संरक्षण और सामाजिक एकजुटता पर जोर

Simdega: जिले के बांसजोर चौक स्थित झारखंड ग्रामीण बैंक के पीछे मैदान में शुक्रवार को विशाल सनातनी समागम सम्मेलन का आयोजन किया...

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Simdega: जिले के बांसजोर चौक स्थित झारखंड ग्रामीण बैंक के पीछे मैदान में शुक्रवार को विशाल सनातनी समागम सम्मेलन का आयोजन किया गया. सम्मेलन में मुख्य रूप से विश्व हिंदू परिषद के धर्माचार्य संपर्क प्रमुख (पटना-गुवाहाटी प्रांत) वीरेंद्र विमल, विहिप जिलाध्यक्ष कौशल राज सिंह देव, जैन मुनि पद्मराज, कुवारमुंडा राजपरिवार के ललु सिंह देव, आनंदपुर राजपरिवार के शिव प्रताप सिंह देव, परबा राजपरिवार के लक्ष्मण मांझी तथा कथावाचक पंडित इंद्र शंकर झा उपस्थित रहे. अतिथियों का स्वागत पारंपरिक सनातन संस्कृति के अनुरूप गाजे-बाजे, जय श्रीराम के जयघोष, गीत-संगीत और नृत्य के साथ किया गया. बांसजोर के बच्चों ने भी अतिथियों का अभिनंदन किया.

सनातन संस्कृति मानव जीवन को दिशा देने वाली शाश्वत जीवन पद्धति- धर्माचार्य संपर्क प्रमुख

कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत भाषण से हुई, जिसे आयोजन समिति के अध्यक्ष रामचंद्र सिंह ने प्रस्तुत किया. अपने विस्तृत संबोधन में धर्माचार्य संपर्क प्रमुख वीरेंद्र विमल ने कहा कि सनातन संस्कृति केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि मानव जीवन को दिशा देने वाली शाश्वत जीवन पद्धति है. उन्होंने कहा कि समय-समय पर अनेक चुनौतियां आने के बावजूद सनातन संस्कृति अपनी मूल चेतना और मूल्यों के कारण सदैव जीवंत रही है. उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा, छत्रपति शिवाजी महाराज, गुरु गोविंद सिंह और गुरु तेग बहादुर जैसे महापुरुषों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महान विभूतियों ने समाज, संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया.

उन्होंने समाज से अपनी सांस्कृतिक जड़ों, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति जागरूक रहने तथा नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि श्री रामरेखा धाम को पर्यटन क्षेत्र घोषित किया गया है, वह हमारा धार्मिक आस्था का केंद्र है, वहां से हमारे संस्कारों की उत्पत्ति होती है. यह मौज-मस्ती का स्थान नही है. ऐसे में उसे जल्द से जल्द तीर्थ क्षेत्र घोषित किया जाए, ताकि भगवान राम के आदर्शों और उनके मर्यादा को जन-जन तक स्थापित किया जा सके.

धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील

विहिप जिलाध्यक्ष कौशल राज सिंह देव ने अपने संबोधन में कहा, कि सनातन संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति उसकी एकता, सहिष्णुता और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना है. उन्होंने कहा कि श्रीरामरेखा धाम जैसे धार्मिक स्थल केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक हैं. उन्होंने समाज के लोगों से धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की. उन्होंने कहा कि परिवार और समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कारों और धार्मिक चेतना को मजबूत करना समय की आवश्यकता है. युवाओं को अपनी संस्कृति, इतिहास और परंपराओं की जानकारी देकर उन्हें समाज निर्माण में सहभागी बनाना होगा.

वहीं, सम्मेलन को संबोधित करते हुए जैन मुनि पद्मराज ने कहा, कि सनातन समाज अब जागृत हो चुका है और हमारी अध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को बचाना हम सभी का कर्तव्य है. उन्होंने सभी लोगों को एकजुट होकर धर्म संस्कृति, पूजन पाठ को बढ़ावा देने, अपने बच्चों में संस्कार देने की बात कही.

इसके अलावा, बार-बारी से राजपरिवार के अंबर शेखर देव, आनंदपुर राजपरिवार के शिव प्रताप सिंह देव तथा कुवारमुंडा राजपरिवार के ललु सिंह देव सहित कई वक्ताओं ने भी सम्मेलन को संबोधित किया. सभी वक्ताओं ने समाज में सद्भाव, संस्कृति संरक्षण और आध्यात्मिक जागरूकता पर बल दिया.

कार्यक्रम में हजारों लोग रहे उपस्थित

कार्यक्रम में एकल अभियान की महिलाओं ने भजन-कीर्तन प्रस्तुत किया, जबकि लीलाम्बर सिंह के नागपुरी गीतों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. सम्मेलन से पूर्व पंडित इंद्र शंकर झा ने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों पर प्रवचन दिया.

इस अवसर पर क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिकों एवं हजारों सनातन धर्मावलंबियों की उपस्थिति रही. मंच संचालन अघना खड़िया ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन रोहित कुमार ठाकुर ने दिया. इस अवसर पर सभी पहानो को भी सम्मानित किया गया. मौके पर कृष्णा शर्मा, सुबोध महतो, श्यामसुंदर मिश्रा, आनंद जैसवाल, तपेश्वर साहू, मोतीलाल सिंह, जगरनाथ बड़ाईक, जगरनाथ बिझिंया, नंदलाल सिंह, साधु सिंह, पंकज साहू, जयशंकर बिझिंया, तुलसी मांझी, शिवा मांझी, सुखदेव प्रधान, विश्वेश्वर प्रधान, नारायण सिंह, नारायण गंझु, जालंधर सिंह, सुभाष साहू, सुदर्शन सिंह, कृष्णा नाग, बालमुकुंद सिंह, मुकुंद सिंह, पार्वती देवी, सरस्वती देवी, मीनाक्षी देवी, सुकरमनी देवी, सावित्री देवी, रेशमा देवी, भुवनेश्वरी देवी, कमला देवी और कुमुदनी देवी सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित थे. सम्मेलन का समापन वंदे मातरम के सामूहिक गायन के साथ हुआ.

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