Click Here
Click Here

झारखंड राज्यसभा रण: कांग्रेस की तल्ख लॉबिंग और माले का वोट बचाओ विलाप, 2008 का कोड़ा राज या 2026 का नाथवानी मैजिक

Ranchi: झारखंड की सियासी आबोहवा में इन दिनों ऑक्सीजन कम और राज्यसभा चुनाव का सस्पेंस ज्यादा घुला हुआ है. विधानसभा परिसर से...

Ranchi: झारखंड की सियासी आबोहवा में इन दिनों ऑक्सीजन कम और राज्यसभा चुनाव का सस्पेंस ज्यादा घुला हुआ है. विधानसभा परिसर से लेकर बंद कमरों तक, गोटियां इस तरह सेट की जा रही हैं कि शह और मात का खेल किसी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म को भी मात दे दे. इस त्रिकोणीय और रहस्यमयी सियासी ड्रामे में तीन मुख्य किरदार उभर कर सामने आए हैं. पहले, कांग्रेस के प्रत्याशी प्रणव झा जो माले के गलियारों में माथा टेक रहे हैं; दूसरे, भाकपा माले के दीपांकर भट्टाचार्य जो ईवीएम से लेकर वाशिंगटन की मिसाइलों तक पर बरस रहे हैं; और तीसरे, परदे के पीछे से मुस्कुराते निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी, जिनके पास जादुई मधुर संबंधों का वो पारस पत्थर है जो विरोधी विधायकों को भी पलक झपकते ही समर्थक बना देता है.

यह भी पढ़ें: रामगढ़ खदान हादसा: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल ने कहा- ‘यह सामूहिक हत्या, हो न्यायिक जांच’

WhatsApp Image 2026-06-13 at 2.57.59 PM (1)

माले दफ्तर में प्रणव झा की इंडिया का अटूट प्रेम

रांची का सियासी पारा तब और चढ़ गया जब कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा अपने लाव-लश्कर के साथ भाकपा माले के राज्य कार्यालय पहुंचे. मौका था माले की राज्य इकाई की बैठक का, लेकिन मकसद था दो विधायकों वाले कामरेडों का दिल जीतना. बैठक में दीपांकर भट्टाचार्य, अरूप चटर्जी, और विनोद सिंह जैसे दिग्गज बैठे थे. बैठक से निकलते ही प्रणव झा के सुर अचानक क्रांतिकारी और जनहितैषी हो गए. उन्होंने माले के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह गठबंधन सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि जनता की आवाज का है.

दीपांकर भट्टाचार्य का चौतरफा हमला

माले के केंद्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि बीजेपी देश से विपक्ष का नामोनिशान मिटाकर वन नेशन-वन इलेक्शन की आड़ में वन नेशन-वन पार्टी का चीनी मॉडल लागू करना चाहती है. उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल दागते हुए पूछा कि कोलकाता में 4,000 ईवीएम मशीनें अचानक कैसे जल गईं? साथ ही तंज कसा कि झारखंड में मध्य प्रदेश जैसा खेल नहीं हो पाया, जहां कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन का नामांकन ही रद्द करवा दिया गया था. यहां परिमल नाथवानी का पर्चा सलामत है, जो बीजेपी के किसी गहरे खेल का हिस्सा है.

परिमल नाथवानी: मधुर संबंधों का वो पुराना कॉरपोरेट जादू

परिमल नाथवाणी की झारखंड की सियासत में एंट्री साल 2008 में हुई थी, जब सूबे में मधुर कोड़ा की बैसाखी वाली सरकार चल रही थी, इतिहास गवाह है कि जब-जब नाथवानी झारखंड के रण में उतरते हैं, अंकगणित के सारे पारंपरिक नियम ध्वस्त हो जाते हैं. वर्तमान परिदृश्य में एनडीए समर्थित इस निर्दलीय उम्मीदवार के पास 24 विधायकों का मजबूत आधार है. जीत के जादुई आंकड़े को छूने के लिए इन्हें महज 4 और वोटों की दरकार है. नाथवानी कैंप के रणनीतिकार खुलेआम मीडिया में मुस्कुराते हुए कह रहे हैं. 4 वोट? यह तो बाएं हाथ का खेल है. हमारे साहब के संबंध सभी दलों के नेताओं से इतने ‘मधुर’ हैं कि शहद भी फीका पड़ जाए.

कांग्रेस बनाम झामुमो: ऑल इज नॉट वेल का क्लाइमेक्स

गठबंधन के भीतर चल रही अंडरकरेंट (अंतर्धारा) अब सतह पर आ चुकी है. विधानसभा परिसर में जब परिमल नाथवानी के नामांकन का विरोध करने कांग्रेस के मंत्री और नेता सड़क पर उतरे, तो उनके पीछे सूनापन था. न तो झामुमो का कोई तीर-कमान दिखा, न राजद की लालटेन जली और न ही माले का लाल झंडा लहराया. कांग्रेस के मंत्री चीखते-चिल्लाते रहे, विधानसभा प्रशासन पर पक्षपात के आरोप लगाते रहे, लेकिन सहयोगियों की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ ने साफ कर दिया कि गठबंधन के भीतर दरार नहीं, बल्कि खाई बन चुकी है.

यह भी पढ़ें: हजारीबाग में फिर भड़का खास महाल भूमि विवाद: अतिक्रमणमुक्त सरकारी जमीन पर दोबारा कब्जे की कोशिश के आरोप, प्रशासन पर उठे सवाल

दिल्ली दरबार एक्टिव: के. राजू और अजय शर्मा की डैमेज कंट्रोल कूटनीति

झारखंड कांग्रेस के मंत्रियों की इस छटपटाहट और सहयोगियों के बदले सुरों ने दिल्ली में बैठे कांग्रेस आलाकमान की नींद उड़ा दी है. यही वजह है कि झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के. राजू और कद्दावर नेता अजय शर्मा को आनन-फानन में रांची भेजा गया है. कांग्रेस नेताओं को अच्छी तरह पता है कि यदि इस चुनाव में क्रॉस-वोटिंग हुई या उनके अपने ही सहयोगियों ने खेल कर दिया, तो आगामी विधानसभा चुनावों से पहले उनका मोमेंटम पूरी तरह बिखर जाएगा. अब देखना यह है कि मतदान की तारीख तक झारखंड की सियासत कौन सी नई करवट लेती है. क्या कांग्रेस अपने कुनबे और सहयोगियों को एकजुट रख पाएगी, या फिर परिमल नाथवानी के मधुर संबंधों की मिठास गठबंधन के कड़वे सच को एक बार फिर देश के सामने बेनकाब कर देगी?

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *