Ranchi : किशोरों (Juveniles) द्वारा किए जाने वाले अपराधों और उनके मामलों के निपटारे को लेकर राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के वर्ष 2024 के आंकड़े सामने आ गए हैं. जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार देश भर में जहां बाल अपराधियों के मामलों को निपटाने की गति में तेजी देखी जा रही है. वहीं झारखंड में लंबित मामलों और दोष सिद्धि की दर को लेकर एक अलग तस्वीर सामने आई है.
जाने क्या कहते है आंकड़े
साल की शुरुआत में लंबित मामले : 287
वर्ष के दौरान पकड़े गए किशोर : 143
कुल मामले : 430
जांच के दौरान खारिज मामले : 00
चेतावनी के बाद घर भेजे गए : 106
स्पेशल होम या फिट संस्थान भेजे गए : 10
जुर्माने के साथ निपटाए गए मामले : 00
कारावास की सजा पाने वाले किशोर : 04
दोषमुक्त या डिस्चार्ज किए गए : 135
दोषी पाए जाने का प्रतिशत : 47.1%
लंबित मामले : 175
दोषी पाए जाने की दर में काफी पीछे है झारखंड
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि झारखंड में पकड़े गए किशोरों में से दोषी ठहराये जाने का प्रतिशत मात्र 47.1% है. यह राष्ट्रीय औसत और पड़ोसी राज्यों के मुकाबले काफी कम है. इसका मतलब यह है कि आधे से अधिक मामलों में किशोर या तो दोषमुक्त हो रहे हैं या उनके मामले खारिज हो रहे हैं. झारखंड में कुल 135 किशोरों को कोर्ट द्वारा बरी या डिस्चार्ज किया गया है.
पड़ोसी राज्यों से तुलना
अगर हम झारखंड की तुलना उसके पड़ोसी राज्यों से करें, तो स्थिति काफी भिन्न नजर आती है. बिहार में कुल 9,351 किशोरों के मामले थे. जिनमें से दोषी पाए जाने का प्रतिशत 84.7% है और वहां 6,289 मामले अब भी लंबित हैं. इसके अलावा छत्तीसगढ़ में कुल 5,449 मामले थे. जहां दोषसिद्धि की दर 85.4% रही और 2,626 मामले लंबित हैं. इनके मुकाबले झारखंड में कुल मामले (430) और लंबित मामले (175) तो काफी कम हैं, लेकिन दोषसिद्धि की दर (47.1%) के मामले में झारखंड इन दोनों राज्यों से बहुत पीछे है.


