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उप निर्वाचन कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर की बहाली पर उठे सवाल, जांच के लिए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को भेजा गया पत्र  

Palamu: पलामू जिले से नियुक्ति में गड़बड़ी का एक गंभीर मामला सामने आया है. उप निर्वाचन कार्यालय में काम करने वाले एक...

Palamu: पलामू जिले से नियुक्ति में गड़बड़ी का एक गंभीर मामला सामने आया है. उप निर्वाचन कार्यालय में काम करने वाले एक कंप्यूटर ऑपरेटर की बहाली को लेकर सवाल उठाए गए हैं. पलामू के लेस्लीगंज  के रहने वाले चंद्र प्रकाश भारद्वाज ने इस मामले की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी और पलामू प्रमंडल के आयुक्त को लिखित शिकायत भेजी है.उन्होंने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और गड़बड़ी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है.  

2014 की बहाली प्रक्रिया पर सवाल

​शिकायत के अनुसार, साल 2014 में पलामू के जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त द्वारा संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर कंप्यूटर ऑपरेटरों की बहाली की गई थी. इसके बाद 28 जुलाई 2014 को एक सरकारी आदेश जारी कर सभी नवनियुक्त ऑपरेटरों को अलग-अलग निर्वाचन कार्यालयों में काम पर तैनात किया गया था. उस समय जारी की गई मुख्य सूची में कुल 15 कंप्यूटर ऑपरेटरों के नाम शामिल थे.  

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आधिकारिक सूची में नाम नहीं होने का आरोप

​शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि साल 2014 की उस आधिकारिक सूची में संबंधित कर्मी श्री शशि मोहन सिंह का नाम कहीं भी दर्ज नहीं है. इससे साफ पता चलता है कि उनकी बहाली तय नियमों के तहत नहीं हुई थी. इसके बावजूद उन्हें झारखंड सरकार के वित्त विभाग के नियमों का हवाला देकर हर महीने भारी संविदा राशि और एकमुश्त मानदेय का लाभ दिया जा रहा है, जो कि पूरी तरह से गलत और नियमों के खिलाफ है. वर्तमान में यह कर्मी जैप-आईटी के माध्यम से आउटसोर्सिंग पर उप निर्वाचन कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में तैनात हैं और साथ ही उपायुक्त के निजी सहायक के रूप में भी काम देख रहे हैं, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो जाता है.  

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मानदेय भुगतान पर भी उठे प्रश्न

चंद्र प्रकाश भारद्वाज ने अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि यह सीधे तौर पर सरकारी धन का दुरुपयोग और गलत तरीके से नौकरी पाने का मामला लगता है. उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि इस गड़बड़ी की तुरंत और निष्पक्ष जांच कराई जाए. इस शिकायत के बाद से प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है और यह मामला मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय तक भी पहुंच चुका है. 

वर्तमान में दोहरी जिम्मेदारी निभाने का दावा

जिले के उपायुक्त इस मामले में अब तक कोई अपनी प्रतिक्रिया भी नहीं दी है अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और राज्य निर्वाचन विभाग इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है.यदि सारे आरोप सही है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई ? यदि सही नहीं हैं तो शिकायतकर्ता पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? ऐसे सिस्टम मे सवाल बहुत है लेकिन जवाब देने वाला कोई नहीं.

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