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पंचपरगनिया भाषा के पुरोधा डॉ. करम चंद्र अहीर को केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने किया सम्मानित

Ranchi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री...

Ranchi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री एवं रांची सांसद संजय सेठ ने राहे प्रखंड के फुलवार गांव पहुंचकर प्रख्यात साहित्यकार, शिक्षाविद् एवं पंचपरगनिया भाषा आंदोलन के अग्रणी हस्ताक्षर डॉ. करम चंद्र अहीर को सम्मानित किया. इस दौरान उन्होंने डॉ. अहीर को शॉल ओढ़ाकर भाषा, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया. इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संजय सेठ ने कहा कि लेखक और साहित्यकार समाज के पथप्रदर्शक होते हैं.

पंचपरगनिया भाषा के विकास में डॉ. अहीर का ऐतिहासिक योगदान

उन्होंने कहा कि पंचपरगना क्षेत्र में भाषाई जागृति की जो अलख डॉ. करम चंद्र अहीर ने जगाई है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी. उन्होंने कहा कि पंचपरगनिया भाषा के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए डॉ. अहीर का योगदान ऐतिहासिक है तथा इसे सदैव याद रखा जाएगा. संजय सेठ ने कहा कि डॉ. अहीर ने अपना संपूर्ण जीवन पंचपरगनिया भाषा और संस्कृति के उत्थान के लिए समर्पित किया है. उनकी साहित्यिक कृतियां क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर हैं और भविष्य की पीढ़ियों को अपनी भाषा और पहचान से जोड़ने का कार्य करेंगी. डॉ. करम चंद्र अहीर ने वर्ष 1980 से पंचपरगनिया भाषा के विकास के लिए संगठित प्रयास शुरू किए थे. वर्ष 1982 में उन्होंने ‘पंचपरगनिया भाषा विकास समिति’ की स्थापना की. उनके नेतृत्व एवं समिति के सदस्यों के अथक प्रयासों से पंचपरगनिया भाषा को रांची विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल कराया गया. उन्होंने पंचपरगनिया भाषा के लिए ‘झाड़ लिपि’ का भी आविष्कार किया, जो इस भाषा के विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है.

डॉ. अहीर को शिक्षा और पर्यावरण क्षेत्र में सम्मान

वर्ष 2008 में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रपति शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. उनकी प्रमुख कृतियों में ‘पंचपरगनिया भाषा का इतिहास’, ‘आदर्श पंचपरगनिया व्याकरण’ तथा ‘पंचपरगनिया भाषा का व्याकरणिक अध्ययन’ शामिल हैं. शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी डॉ. अहीर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. वयस्क शिक्षा परियोजना पदाधिकारी के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने घाटशिला के ताम्बाजुड़ी तथा पोटका के तिरुलडीह गांव को पूर्ण साक्षर बनाने में अहम योगदान दिया. वहीं पांच एकड़ बंजर भूमि पर औषधीय, फलदार और इमारती वृक्ष लगाकर पर्यावरण संरक्षण का भी अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है. कार्यक्रम में रांची जिला ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष धीरज महतो, विनय, दिलेश्वर कोइरी, खगेश महतो, मेघनाथ महतो, गंगाधर साव, उमेश महतो, नागेश्वर महतो, दीपक कुमार सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे.

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