Ranchi : एक ओर सरकार वर्ष 2047 तक सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन का लक्ष्य लेकर अभियान चला रही है. वहीं दूसरी ओर झारखंड में हजारों मरीज आज भी बेहतर इलाज, नियमित रक्त आपूर्ति और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी जीवनरक्षक सुविधाओं के इंतजार में हैं. राज्य में सिकल सेल, थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित मरीजों की वास्तविक संख्या को लेकर अब भी स्पष्ट आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं. विभिन्न संगठनों और मरीज समूहों के अनुसार अब तक करीब 16 हजार मरीज पंजीकृत हैं, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है. सरकार के पास भी इन बीमारियों से प्रभावित लोगों का पूरा और अद्यतन डाटा उपलब्ध नहीं है.
आनुवंशिक बीमारी है एनीमिया
सिकल सेल एनीमिया एक आनुवंशिक रक्त संबधी बीमारी है. जो विशेष रूप से आदिवासी समुदायों में अधिक पाया जाता है. इस बीमारी में लाल रक्त कणिकाएं सामान्य गोल आकार के बजाय दरांतीनुमा हो जाती हैं. जिससे शरीर में रक्त संचार प्रभावित होता है और मरीज को असहनीय दर्द, एनीमिया, बार बार संक्रमण और कई गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ता है.
16 हजार लोग प्रभावित
झारखंड में लगभग 16 हजार लोग सिकल सेल, थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया जैसी गंभीर रक्त संबंधी बीमारियों से प्रभावित हैं. इनमें अधिकांश मरीज आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं और महंगे इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ हैं. मरीज संगठनों का आरोप है कि राज्य सरकार द्वारा अब तक कोई व्यापक सर्वेक्षण या ऑडिट नहीं कराया गया है. जिससे वास्तविक स्थिति सामने आ सके.
हर साल 2.6 लाख यूनिट रक्त की जरूरत
थैलेसीमिया मरीजों की स्थिति और भी चिंताजनक है. एक मरीज को हर महीने औसतन 2 से 3 यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है. मरीज संगठनों के सर्वे के अनुसार राज्य में इन बीमारियों से ग्रसित लोगों के लिए प्रतिवर्ष लगभग 2.6 लाख यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है. रक्त की उपलब्धता में कमी होने पर मरीजों का जीवन सीधे खतरे में पड़ जाता है.
बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध नहीं
सबसे बड़ी चिंता यह है कि इन बीमारियों के स्थायी उपचार के लिए जरूरी बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा झारखंड में उपलब्ध नहीं है. गंभीर मरीजों को इलाज के लिए राज्य से बाहर जाना पड़ता है, जहां लाखों रुपये खर्च होते हैं. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह खर्च उठाना लगभग असंभव साबित होता है.
2023 में हुई थी शुरूआत
केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 में राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन की शुरुआत की थी. इसके तहत 0 से 40 वर्ष आयु वर्ग के करोड़ों लोगों की स्क्रीनिंग, आनुवंशिक परामर्श, मुफ्त दवा और उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. बावजूद इसके विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, समय पर जांच और बेहतर स्वास्थय सुविधाओं के बिना लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं होगा.
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