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अमेरिका-ईरान शांति समझौते से भारत को बड़ा फायदा, तेल और चाबहार पोर्ट पर राहत

Newswave Desk: 28 फरवरी से जारी ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच संघर्ष अब खत्म हो गया है और दोनों देशों के बीच...

Newswave Desk: 28 फरवरी से जारी ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच संघर्ष अब खत्म हो गया है और दोनों देशों के बीच शांति समझौता (US-Iran Peace Deal) लागू हो चुका है. इस समझौते के बाद वैश्विक स्तर पर बने तेल और गैस संकट के कम होने की उम्मीद जताई जा रही है. समझौते के तहत ईरान के पेट्रोलियम उत्पादों पर लगी पाबंदियों को हटाने का प्रावधान शामिल है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल आपूर्ति सामान्य हो सकती है. इसका सीधा फायदा भारत को भी मिल सकता है, क्योंकि भारत फिर से ईरान से कच्चे तेल का आयात शुरू कर सकता है.

इस समझौते में अमेरिका की ओर से ईरान के कच्चे तेल एक्सपोर्ट, बैंकिंग ट्रांजैक्शन और ट्रांसपोर्टेशन पर लगे प्रतिबंधों को हटाने की बात कही गई है. इसके बाद भारत और ईरान के बीच तेल व्यापार दोबारा शुरू होने की संभावना मजबूत हो गई है. औपचारिक समझौते के बाद 60 दिनों की बातचीत अवधि भी होगी, जिसमें दोनों पक्ष अंतिम शर्तों को तय करेंगे.

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नए समझौते से भारत को कैसे होगा फायदा ?

गौरतलब है कि 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारतीय रिफाइनरियों ने ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था. उससे पहले ईरान भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल था और भारत के कुल कच्चे तेल आयात में उसकी हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत तक थी. वहीं अब नए समझौते से ईरानी तेल एक्सपोर्ट की पूरी बहाली का रास्ता खुल सकता है. चूंकि ईरान की आय का बड़ा हिस्सा ऊर्जा एक्सपोर्ट पर निर्भर है, इसलिए वह तेजी से अपने तेल एक्सपोर्ट को फिर से बढ़ाने की कोशिश करेगा.

ICRA के कॉर्पोरेट रेटिंग्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ के अनुसार, ईरानी तेल पर प्रतिबंध हटना भारत के लिए फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि भौगोलिक नजदीकी के साथ-साथ बेहतर क्रेडिट अवधि भी मिलती रही है. ईरान पहले भारत को 60–90 दिनों की क्रेडिट सुविधा देता था, जबकि अन्य सप्लायर आमतौर पर केवल 30 दिनों की सुविधा देते हैं.

चाबहार पोर्ट को भी मिल सकता है फायदा

इस समझौते का असर सिर्फ तेल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत के चाबहार पोर्ट पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. प्रतिबंधों में ढील मिलने से इस पोर्ट का संचालन आसान हो सकता है और इसकी रणनीतिक भूमिका और मजबूत हो सकती है. अमेरिकी प्रतिबंधों की समयसीमा समाप्त होने से पहले भारत ने पोर्ट संचालन को अस्थायी रूप से एक ईरानी कंपनी को सौंपने की व्यवस्था की थी. समझौते के अनुसार, अमेरिका धीरे-धीरे ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाएगा.

इससे भारत को चाबहार पोर्ट के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के संचालन में फिर से पूरी भागीदारी मिलने की संभावना है. भारत ने इस परियोजना में लगभग 370 मिलियन डॉलर (करीब 3,200 करोड़ रुपये) निवेश करने का वादा किया है. पिछले साल SCO सम्मेलन में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पोर्ट पर विशेष जोर दिया था. यह समझौता भारत के ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय व्यापार दोनों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है.

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