Pakur: सदर प्रखंड के कोलाजोड़ा पंचायत स्थित बारहाबाद में करोड़ों रुपये की लागत से बना स्वास्थ्य केंद्र आज अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है. आदिवासी बहुल क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के उद्देश्य से करीब पांच वर्ष पहले इस भवन का निर्माण कराया गया था, लेकिन आज तक यहां नियमित स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हो सकी हैं. नतीजा यह है कि ग्रामीण इलाज के लिए 10 किलोमीटर दूर सदर अस्पताल जाने को मजबूर हैं, जबकि करोड़ों की लागत से बना अस्पताल झाड़ियों और वीरानी के बीच अपनी उपयोगिता खोता नजर आ रहा है.

करोड़ों की लागत से बना अस्पताल, लेकिन सेवा शुरू नहीं
सदर अस्पताल से लगभग 10 किलोमीटर दूर बारहाबाद गांव में करोड़ों रुपये खर्च कर स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया गया था. इसका उद्देश्य सुदूरवर्ती आदिवासी इलाकों के लोगों को स्थानीय स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना था. लेकिन निर्माण के कई वर्ष बाद भी अस्पताल पूरी तरह चालू नहीं हो पाया है.
इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर ग्रामीण

स्वास्थ्य केंद्र में नियमित चिकित्सा व्यवस्था नहीं होने के कारण ग्रामीणों को छोटी-बड़ी बीमारी के इलाज के लिए पाकुड़ सदर अस्पताल या अन्य स्वास्थ्य केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है. इससे विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. देखरेख के अभाव में अस्पताल परिसर झाड़ियों से भर गया है. भवन उपयोग के अभाव में धीरे-धीरे जर्जर होने लगा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते अस्पताल को चालू नहीं किया गया तो करोड़ों रुपये की यह परिसंपत्ति पूरी तरह बेकार हो जाएगी.
आदिवासी क्षेत्र के लिए था महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट
बारहाबाद आदिवासी बहुल क्षेत्र है. इसी कारण यहां स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए इस अस्पताल का निर्माण कराया गया था. उम्मीद थी कि आसपास के गांवों के लोगों को प्राथमिक उपचार और स्वास्थ्य सेवाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकेंगी, लेकिन यह उद्देश्य अब तक पूरा नहीं हो सका है.
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