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Newswave Special: वोट के लिए मारामारी, विकास पर लाचारी, झारखंड के 11 सांसद लो परफॉरमर, विकास के 17.6% काम ही किए पूरे, एक भी सांसद 70 % खर्च करने वाला नहीं 

Ranchi: लोकसभा की टिकट चाहिए ? मारामारी मचेगी. राज्यसभा की सीट पक्की करनी है? तो साम-दाम-दंड-भेद, हर हथकंडा अपनाया जाएगा. दिल्ली के...

Jharkhand Politics
Credit:- Google Image

Ranchi: लोकसभा की टिकट चाहिए ? मारामारी मचेगी. राज्यसभा की सीट पक्की करनी है? तो साम-दाम-दंड-भेद, हर हथकंडा अपनाया जाएगा. दिल्ली के सत्ता गलियारों की मखमली कुर्सियों तक पहुंचने के लिए झारखंड के सियासतदानों में जो आक्रामकता और छटपटाहट दिखती है, लेकिन वैसी ही फुर्ती उन्हें अपनी जनता के विकास के लिए नहीं दिखती. चुनाव जीतने तक वादों की जो झड़ी लगती है, संसद की दहलीज पार करते ही वह ठंडे बस्ते में चली जाती है. झारखंड से चुनकर संसद पहुंचने वाले कुल 19 (लोकसभा और राज्यसभा) सांसदों का रिर्पोट कार्ट भी चौंकाने वाला है. एक तरफ सूबे की जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है और दूसरी तरफ इन सांसदों के पास आया करोड़ों का सरकारी फंड फाइलों में धूल फांक रहा है.

315.9 करोड़ जारी, 138.9 करोड़ खर्च और 177 करोड़ खर्च नहीं

केंद्र सरकार द्वारा झारखंड के सभी 19 सांसदों के लिए अब तक 315.9 करोड़ रुपए जारी किए गए. इसमें से सांसदों ने अब तक 138.9 करोड़ ही राशि विकास कार्यों में खर्च की गई. अब तक 177 करोड़ की राशि खर्च नहीं की जा सकी है. सांसदों ने अब तक विकास कार्यों के लिए मिली कुल राशि का महज 44.8 फीसदी ही खर्च किया है.

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सिर्फ 17.6 फीसदी पूरे हुए काम 

सरकारी कागजों और दावों से इतर जमीनी हकीकत यह है कि अभी तक तय किए गए विकास कार्यों में से सिर्फ 17.6 फीसदी काम ही पूरे हो सके हैं. सांसदों को मिलने वाला एमपीलैड फंड जनता के टैक्स का पैसा है, जो सीधे उनके इलाके की पानी, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए दिया जाता है. चुनाव के वक्त ‘झारखंड का विकास’ का नारा बुलंद करने वाले नेता जब दिल्ली पहुंचते हैं, तो उनके लिए यह फंड प्राथमिकता क्यों नहीं रहता.

19 में से 11 सांसद लो परफॉरमर और 1 निष्क्रीय

परफॉर्मेंस के पैमाने पर जब इन 19 सांसदों को तौला गया, तो 11 सांसद लो परफॉरमर की श्रेणी में आ गए. सांसदों की परफॉर्मेंस को तीन श्रेणियों (हाई, मीडियम और लो यूटिलाइजेशन) में बांटा गया है:
• 11 सांसद (40% से कम खर्च): इस फिसड्डी यानी ‘लो परफॉर्मेंस’ श्रेणी में सूबे के 11 सांसद शामिल हैं.
• 1 सांसद (पूरी तरह ठप): एक सांसद को सीधे ‘निष्क्रीय की श्रेणी में डाल दिया गया है.
• 5 सांसद (40% से 69% खर्च): सिर्फ 5 सांसद मध्यम श्रेणी में जगह बना पाए हैं.
• 2 सांसद (कंसिस्टेंट परफॉर्मर): पूरी लिस्ट में केवल 2 सांसद ऐसे हैं जिन्होंने लगातार काम किया है.
• ‘हाई यूटिलाइजेशन’ (70 फीसदी से अधिक राशि खर्च करने वाले) की श्रेणी में झारखंड का एक भी सांसद अपनी जगह नहीं बना पाया है.

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