Click Here
Click Here
Click Here

बिजली सरप्लस हुआ झारखंड : हर महीने होगी 200 करोड़ की कमाई, NTPC के पतरातू और नॉर्थ कर्णपुरा प्लांट पर सबसे ज्यादा भरोसा

Ranchi : झारखंड, जिसने दशकों तक अपनी खनिज संपदा से पूरे देश को रोशन किया. अब खुद बिजली के मामले में आत्मनिर्भर...

पावर ग्रिड का निवेशकों को अल्टीमेटम

Ranchi : झारखंड, जिसने दशकों तक अपनी खनिज संपदा से पूरे देश को रोशन किया. अब खुद बिजली के मामले में आत्मनिर्भर ही नहीं, बल्कि  सरप्लस स्टेट बन चुका है. राज्य के गठन के 25 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, यह ऐतिहासिक उपलब्धि बुधवार रात को हासिल हुआ. पतरातू स्थित PVUNL की 800 मेगावाट क्षमता वाली दूसरी यूनिट के कॉमर्शियल ऑपरेशन की शुरुआत के साथ ही राज्य की बिजली व्यवस्था ने एक नई उड़ान भरी है.

पावर सरप्लस : विकास को मिलेगी नई रफ्तार

पतरातू की नई इकाइयों से अब कुल 1600 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है. जिसमें से 85% यानी 1360 मेगावाट बिजली सीधे झारखंड को मिलेगी. इस नई शुरुआत से राज्य के पास 700 मेगावाट सरप्लस (अतिरिक्त) बिजली उपलब्ध हो गई है. यह केवल एक तकनीकी आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह राज्य के औद्योगिक और घरेलू विकास के लिए एक गेम चेंजर साबित होगा. अब झारखंड को बिजली कटौती और  लोड शेडिंग की पुरानी समस्याओं से मुक्ति मिलेगी.

राजस्व में होगा भारी इजाफा

बिजली के मामले में सरप्लस होने का सबसे बड़ा आर्थिक लाभ राज्य के खजाने को होगा. जेबीवीएनएल अतिरिक्त बिजली अन्य राज्यों को बेचने की तैयारी में है. अनुमान है कि इस सरप्लस बिजली की बिक्री से राज्य को प्रति माह लगभग 200 करोड़ रुपये की सीधी आमदनी होगी. यह राजस्व राज्य की अन्य जन-कल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास में नई जान फूंकेगा.

डीवीसी क्षेत्र में दूर होगी अंधेरे की समस्या

इस उपलब्धि का सबसे बड़ा और सकारात्मक प्रभाव उन जिलों पर पड़ेगा जो लंबे समय से बिजली संकट से जूझ रहे थे. विशेष रूप से धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, गिरिडीह, कोडरमा, रामगढ़ और चतरा जिलों में बिजली की मांग बढ़ रही थी. जिससे आमजन को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. अब इन क्षेत्रों में डीवीसी कमांड एरिया के माध्यम से अतिरिक्त 200 मेगावाट बिजली की आपूर्ति की जाएगी. साथ ही, डीवीसी और जेबीवीएनएल के बीच प्रस्तावित संयुक्त उपक्रम के गठन से इन सात जिलों की वितरण व्यवस्था का कायापलट होगा. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल के साथ हुई सार्थक चर्चा और उसके बाद मिली यह सफलता राज्य के लिए किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है.

एनटीपीसी के पतरातू और नॉर्थ कर्णपुरा प्लांट पर सबसे ज्यादा भरोसा

एनटीपीसी के पतरातू यूनिट-वन से वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1,721.54 करोड़ रुपए की बिजली खरीदी जाएगी. जो 2030-31 तक बढ़कर 2,855.84 करोड़ रुपए हो जाएगी. पतरातू यूनिट-टू से पहले वर्ष 850.87 करोड़ रुपए की खरीद होगी. जो पांचवें वर्ष तक 2,906.13 करोड़ रुपए पहुंचने का अनुमान है. नॉर्थ कर्णपुरा प्लांट से पांच वर्षों में क्रमशः 757.92 करोड़, 795.81 करोड़, 835.60 करोड़, 877.38 करोड़ और 921.25 करोड़ रुपए की बिजली खरीदी जाएगी. इसके अलावा फरक्का, बाढ़, कहलगांव, नबीनगर, कांटी पावर, तालचेर और डार्लीपल्ली प्लांटों से भी बिजली खरीद की जाएगी. हालांकि कोरबा प्लांट से कोई खरीद प्रस्तावित नहीं है.

बिजली के लीकेज पर 4120 करोड़ का मेगा प्लान

बिजली आपूर्ति से सबसे बड़ी चुनौती लाइन लॉस (बिजली का नुकसान) को कम करना है. इसके लिए राज्य सरकार ने 4120.39 करोड़ रुपए का बजट तैयार किया है. इस राशि का उद्देश्य बिजली चोरी रोकना और तकनीकी खामियों को दूर करना है. इसमें केंद्रीय सहायता के रूप में 2087.5 करोड़ रुपए मिलेंगे. जबकि राज्य की हिस्सेदारी 2032.79 करोड़ रुपए होगी.

 

ALSO READ : JAP-1 में DSP और 334 पुलिसकर्मियों का पासिंग आउट परेड आज, CM हेमंत सोरेन होंगे शामिल

add1
सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *