Jamshedpur: पोटका पीएमश्री कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की सातवीं कक्षा की छात्रा लख्खी सरदार की ब्रेन मलेरिया से मौत हो गई है. इस घटना के बाद परिवार और पूरे गांव में मातम पसरा है. परिजनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.
अनाथ छात्रा की दर्दनाक मौत
सानग्राम पंचायत के सानग्राम गांव निवासी लख्खी सरदार के माता-पिता का वर्षों पहले निधन हो चुका था. अनाथ होने के कारण परिजनों ने बेहतर शिक्षा की उम्मीद में उसका नामांकन पीएमश्री कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, पोटका में कराया था. विद्यालय में पढ़ाई के दौरान अचानक तेज बुखार से उसकी तबीयत बिगड़ गई.

इलाज के दौरान तोड़ा दम
विद्यालय प्रबंधन ने छात्रा को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पोटका में भर्ती कराया. हालत गंभीर होने पर उसे सदर अस्पताल और फिर एमजीएम अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. चिकित्सकों ने मौत की वजह ब्रेन मलेरिया बताई है.
मुखिया ने उठाए गंभीर सवाल
सानग्राम पंचायत के मुखिया ने घटना पर दुख जताते हुए विद्यालय की स्वास्थ्य और आवासीय व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार कस्तूरबा विद्यालयों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन बच्चों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षित माहौल नहीं मिल पा रहा है. मुखिया का आरोप है कि समय पर समुचित देखभाल मिलती, तो छात्रा की जान बच सकती थी. उन्होंने उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है.
मुखिया का बयान
लख्खी सरदार अनाथ बच्ची थी. हम लोगों ने भरोसे के साथ उसे कस्तूरबा स्कूल में पढ़ने भेजा था. लेकिन वहां उसे ब्रेन मलेरिया हो गया और समय पर इलाज नहीं मिलने से उसकी मौत हो गई. सरकार इतना पैसा खर्च करती है, फिर भी बच्चों की देखभाल नहीं हो रही. हम मांग करते हैं कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो. कहीं कोई लापरवाही हुई है तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो, ताकि आगे किसी और बच्ची के साथ ऐसा न हो.
परिजनों ने भी उठाई जांच की मांग
मृत छात्रा के परिजनों ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की है. उनका कहना है कि छोटी उम्र में बीमारी से बच्ची की मौत बेहद दुखद है. दोषियों पर कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं.
गांव में शोक का माहौल
घटना के बाद सानग्राम गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक का माहौल है. ग्रामीणों ने भी प्रशासन से मामले की गंभीरता से जांच कर कार्रवाई की मांग की है.
परिजनों का बयान
हमारी बच्ची को स्कूल में क्या हुआ, कैसे बुखार बढ़ा, इलाज में देर क्यों हुई, इसकी जांच होनी चाहिए. वह अनाथ थी, हम लोगों ने उम्मीद से स्कूल भेजा था. अब वह लौटकर नहीं आएगी. सरकार और प्रशासन से मांग है कि जांच कर दोषियों को सजा दी जाए. किसी और गरीब की बेटी के साथ ऐसा न हो.


