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बोकारो : प्रशासनिक मुस्तैदी से शांतिपूर्ण संपन्न हुआ मुहर्रम, पलानी विवाद के बाद DC-SP के क्राइसिस मैनेजमेंट की चौतरफा सराहना

Bokaro: बोकारो जिला और विशेषकर बेरमो अनुमंडल के तमाम संवेदनशील क्षेत्रों में शुक्रवार को मुहर्रम का त्योहार पूरी तरह शांतिपूर्ण, सुरक्षित और...

Bokaro: Muharram concludes peacefully thanks to administrative alertness; DC and SP receive widespread praise for their crisis management following the Palani dispute.

Bokaro: बोकारो जिला और विशेषकर बेरमो अनुमंडल के तमाम संवेदनशील क्षेत्रों में शुक्रवार को मुहर्रम का त्योहार पूरी तरह शांतिपूर्ण, सुरक्षित और आपसी सौहार्द के वातावरण में संपन्न हो गया. इस बड़े त्योहार के निर्विघ्न बीतने के बाद जिला और अनुमंडल प्रशासन ने राहत की सांस ली है. मुहर्रम को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के पीछे बोकारो के डीसी अजय नाथ झा और पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीणा सहित बेरमो के एसडीएम मनोज कुमार एवं एसडीपीओ रविंद्र कुमार सिंह के कुशल नेतृत्व, अद्वितीय कार्यशैली और रणनीतिक सूझबूझ की मुख्य भूमिका रही. इन अधिकारियों की टीम ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था को मजबूत रखा, बल्कि जनता के बीच जाकर उनका विश्वास जीतकर सांप्रदायिक सौहार्द की एक नई मिसाल पेश की है. मुहर्रम के ठीक दो दिन पहले गोमिया थाना क्षेत्र के पलानी में उपजे एक विवाद ने प्रशासनिक परीक्षा की घड़ी पैदा कर दी थी, जिससे क्षेत्र में तनाव फैलने की आशंका बढ़ गई थी. ऐसे नाजुक समय में डीसी अजय नाथ झा और एसपी नाथू सिंह मीणा ने दफ्तरों से निकलकर खुद कमान संभाली और पलानी में ही डेरा डाल दिया. आला अधिकारियों ने अपनी टीम के साथ वहां कैंप कर स्थिति को न सिर्फ चैबीस घंटे के भीतर सामान्य बनाया, बल्कि उपद्रवी तत्वों को कड़ा संदेश भी दिया. इसके साथ ही, पिछले एक सप्ताह से पूरी प्रशासनिक चैकड़ी लगातार मैराथन बैठकों और क्षेत्र भ्रमण में जुटी रही. एसडीएम मनोज कुमार और एसडीपीओ रविंद्र कुमार सिंह ने गोमिया और नावाडीह प्रखंड के अति-संवेदनशील और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों का लगातार तूफानी दौरा किया.

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अधिकारियों ने किया सीधा संवाद

अधिकारियों ने मुस्लिम समुदाय के प्रबुद्ध जनों, शांति समिति के सदस्यों और स्थानीय ग्रामीणों के साथ सीधा संवाद स्थापित कर उन्हें सुरक्षा का अटूट भरोसा दिलाया और शांतिपूर्वक त्योहार मनाने की अपील की. प्रशासन के इसी जन-सरोकारी दृष्टिकोण और क्राइसिस मैनेजमेंट (संकट प्रबंधन) का परिणाम रहा कि संवेदनशील मोड़ों पर भी अखाड़ा और ताजिए के जुलूस पूरी शालीनता व भाईचारे के साथ निकाले गए. पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की इस कर्तव्यनिष्ठा, सजगता और चैबीस घंटे मुस्तैद रहने वाली कार्यशैली की अब पूरे जिले में जमकर सराहना हो रही है. आम जनता और बुद्धिजीवियों का कहना है कि शीर्ष अधिकारियों के आपसी तालमेल और सुदूर गांवों तक उनकी व्यक्तिगत पहुंच के कारण ही बोकारो जिला इस बड़े इम्तिहान में पूरी तरह सफल रहा और मुहर्रम का त्योहार क्षेत्र की साझी संस्कृति को मजबूत करते हुए शांति के साथ संपन्न हो गया.

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