Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची में इस वर्ष मुहर्रम का त्योहार न सिर्फ शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ, बल्कि इसने गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की एक ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी चर्चा पूरे राज्य में हो रही है. जहां एक तरफ देश के कुछ हिस्सों से अक्सर तनाव की खबरें आती हैं. वहीं रांची के मुख्य मुहर्रम जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कुछ ऐसा किया जिसने हर किसी का दिल जीत लिया.
ताशे की थाप और बजे श्री राम के भजन
रांची के मेन रोड से गुजर रहे मुहर्रम के जुलूस के दौरान एक ऐसा पल आया, जिसने वहां मौजूद हर नागरिक को भावुक और गर्व से भर दिया. जुलूस में शामिल मुस्लिम समाज के बुजुर्ग और युवाओं ने आपसी सौहार्द का परिचय देते हुए प्रभु श्री राम के भजनों की धुन पर पारंपरिक वाद्य यंत्र ‘ताशा’ बजाया. जैसे ही ताशे की थाप पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के भजनों की धुन गूंजी, वहां मौजूद हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों के लोग एक साथ झूम उठे. इस दृश्य ने यह साबित कर दिया कि त्योहार चाहे किसी भी धर्म का हो, दिलों को जोड़ने का जरिया बन सकता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक धुन नहीं, बल्कि नफरत फैलाने वाली ताकतों के मुंह पर एक करारा तमाचा था.

त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ
इस वर्ष रांची में मुहर्रम का त्योहार पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ. जिला प्रशासन, पुलिस बल और दोनों समुदायों के प्रबुद्ध नागरिकों की मुस्तैदी के कारण कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली. रांची पुलिस और जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे. संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी जा रही थी. शहर के विभिन्न चौराहों पर हिंदू समुदाय के लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा मुहर्रम के जुलूस और अखाड़ों का स्वागत शरबत, पानी और फूल बरसाकर किया गया. सेंट्रल मुहर्रम कमेटी के पदाधिकारियों ने भी प्रशासन और स्थानीय पूजा समितियों का आभार व्यक्त किया कि सभी ने मिलकर इस त्योहार को शांतिपूर्वक संपन्न कराने में सहयोग दिया.


