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हजारीबाग में भगवान जगन्नाथ की स्नान विधि संपन्न, 15 दिनों के लिए अनसर गृह में रहेंगे महाप्रभु

Hazaribagh: बड़कागांव प्रखंड स्थित राम जानकी मंदिर में सोमवार को भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा का देवस्नान अनुष्ठान श्रद्धा...

Hazaribagh: बड़कागांव प्रखंड स्थित राम जानकी मंदिर में सोमवार को भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा का देवस्नान अनुष्ठान श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ. पुजारी चिंतामणि महतो के नेतृत्व में पूजा-अर्चना, भोग और आरती की गई. अनुष्ठान के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को परंपरा के अनुसार अनसर (विश्राम) काल में विराजमान किया गया. राम जानकी मंदिर पूजा समिति के अध्यक्ष पिंटू गुप्ता और पुजारी चिंतामणि महतो ने बताया कि पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा पर देवस्नान के बाद भगवान जगन्नाथ 15 दिनों के लिए अस्वस्थ हो जाते हैं. इस अवधि में मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बंद रहते हैं. भगवान को एकांतवास में रखकर विशेष औषधियों से उपचार किया जाता है.

धूमधाम से निकलेगी रथ यात्रा

उन्होंने बताया कि बड़कागांव में प्रत्येक वर्ष भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा धूमधाम से निकाली जाती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं. रथ यात्रा की तैयारियां कई महीने पहले से शुरू हो जाती हैं. आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से रथ यात्रा प्रारंभ होती है और शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को भगवान की वापसी के साथ इसका समापन होता है. देवस्नान अनुष्ठान में पुजारी चिंतामणि महतो, गायत्री देवी, मनोज गुप्ता, पिंटू गुप्ता, संतोष सोनी, बीना सिंह, सुनीता देवी, अंतू महतो, रविंद्र लाल, हरिनाथ राम, कैलाश कुमार, आनंद कुमार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे.

क्यों बीमार पड़ते हैं भगवान जगन्नाथ

धार्मिक मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन 108 कलशों के पवित्र जल से स्नान कराने के बाद भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ हो जाते हैं. उनके स्वास्थ्य लाभ के लिए वैद्य द्वारा काढ़ा पिलाया जाता है और 15 दिनों तक उन्हें केवल काढ़ा एवं फलों का रस अर्पित किया जाता है. इस दौरान भगवान को शीतल लेप लगाया जाता है तथा रात्रि में मीठा दूध अर्पित किया जाता है. अनसर काल में मंदिर में घंटी नहीं बजती, श्रद्धालुओं को दर्शन नहीं होते और भगवान को अन्न का भोग भी नहीं लगाया जाता. भगवान जगन्नाथ 15 दिनों तक उपचार और विश्राम के बाद पुनः भक्तों को दर्शन देंगे. इसके बाद 16 जुलाई को भव्य रथ यात्रा मेला आयोजित किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है.

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