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कुर्सी एक, जिम्मेदारियां अनेक, झारखंड की फाइलों के बोझ तले दबे IAS अफसर, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

Ranchi: झारखंड की ब्यूरोक्रेसी में एक पद, अनेक प्रभार का बोलबाला है. राज्य में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की तैनाती की...

One chair, many responsibilities: IAS officers in Jharkhand buried under the burden of files—read the full report.

Ranchi: झारखंड की ब्यूरोक्रेसी में एक पद, अनेक प्रभार का बोलबाला है. राज्य में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की तैनाती की ताजा सूची के अनुसार शासन की बागडोर संभालने वाले आला अधिकारियों के कंधों पर सिर्फ एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि वे एक साथ कई महकमों का बोझ ढो रहे हैं. आइए, एक नजर डालते हैं उन अधिकारियों पर जो अपनी मुख्य जिम्मेदारी के साथ-साथ कई अन्य विभागों को भी पटरी पर दौड़ा रहे हैं. पढ़ें न्यूज वेव झारखंड की खास रिपोर्ट

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अतिरिक्त प्रभार के बहुआयामी दिग्गज

अजय कुमार सिंह (1995 बैच): वर्तमान में अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के रूप में कार्यरत हैं. इसके साथ ही, उन पर विकास आयुक्त, झारखंड जैसा महत्वपूर्ण प्रभार भी है. वे स्वास्थ्य के साथ-साथ विकास योजनाओं की निगरानी की दोहरी कमान संभाल रहे हैं.
वंदना दादेल (1996 बैच): अपर मुख्य सचिव, गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की कमान संभाल रही वंदना दादेल राज्य की आंतरिक सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं. साथ ही, उन पर अतिरिक्त मुख्य सचिव, मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग का भी जिम्मा है. गृह और कैबिनेट का समन्वय होने से प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया में तेजी देखी जाती है.
अरवा राजकमल (2008 बैच): वर्तमान में सचिव, भवन निर्माण विभाग के पद पर तैनात होने के बावजूद, उनके पास आधा दर्जन अतिरिक्त प्रभार है. वे झारखंड भवन (नई दिल्ली) के रेजिडेंट कमिश्नर हैं, साथ ही झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम के एमडी भी हैं. इतना ही नहीं, खान एवं भूतत्व विभाग, उद्योग विभाग और झारखंड राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष के रूप में भी वे कार्यरत हैं. छह महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का एक साथ निर्वहन कर रहे हैं.
सुनील कुमार (1999 बैच): प्रधान सचिव, पथ निर्माण विभाग की जिम्मेदारी के साथ सुनील कुमार शहरी विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव भी हैं. साथ ही, वे जूडको और जीआरडीए जैसे महत्वपूर्ण संस्थाओं के एमडी भी हैं.

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प्रशांत कुमार (2004 बैच): जल संसाधन विभाग के सचिव प्रशांत कुमार पर वित्त विभाग जैसे संवेदनशील मंत्रालय की जिम्मेदारी है. इसके अतिरिक्त, वे झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष भी हैं, जो राज्य में भर्ती प्रक्रियाओं की शुचिता बनाए रखने में महत्वपूर्ण है.

मनोज कुमार (2006 बैच): ग्रामीण विकास विभाग के सचिव के रूप में कार्य करते हुए, उन पर ग्रामीण कार्य विभाग और पंचायती राज विभाग का भी जिम्मा है. यह एक सामंजस्यपूर्ण संयोजन है, क्योंकि तीनों विभाग ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे से गहराई से जुड़े हैं.
शशि रंजन (2014 बैच): एडिशनल सेक्रेट्री पेयजल एवं स्वच्छता विभाग होने के साथ-साथ वे ‘जल जीवन मिशन’ के मिशन निदेशक भी हैं. साथ ही, सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार और सीइओ,सिदो-कान्हो एग्रीकल्चर एंड फॉरेस्ट प्रोड्यूस स्टेट कॉपरॉटिव फेडरेशन लिमिटेड के सीईओ के रूप में वे सहकारी तंत्र को मजबूत कर रहे हैं.
आदित्य कुमार आनंद (2013 बैच): श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग के विशेष सचिव के साथ-साथ वे ‘रोजगार एवं प्रशिक्षण’ निदेशक का कार्यभार भी देख रहे हैं. यह युवाओं के रोजगार के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण कड़ी है.
उमा शंकर सिंह (2009 बैच): स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव के साथ-साथ उन पर महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी है. यह दोनों विभाग भविष्य की पीढ़ी और समाज के कमजोर वर्गों के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं.
अबू बकर सिद्दीकी पी. (2003 बैच): वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के साथ-साथ वे कृषि, पशुपालन और सहकारिता विभाग के सचिव भी हैं.कृषि और पर्यावरण का समन्वय उनके हाथ में है.
माधवी मिश्रा (2015 बैच): सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की निदेशक के साथ-साथ वेझारखंड अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र की निदेशक और एबीवीएलL की सीईओ भी हैं. डिजिटल झारखंड की परिकल्पना को साकार करने में उनका प्रभार अहम है.
शशि रंजन (2013 बैच): राज्य परियोजना निदेशक, जेइपीसी के साथ-साथ वे जेसीइआरटी और मिड डे मील अथॉरिटी के निदेशक भी हैं. प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता और कुपोषण से लड़ने की बड़ी जिम्मेदारी उन पर है.

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