Ranchi: केंद्रीय गृह मंत्री (Union Home Minister) अमित शाह (Amit Shah) ने हूल दिवस के अवसर पर वर्ष 1855 की ऐतिहासिक संथाल क्रांति के अमर बलिदानियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि जनजातीय अस्मिता और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करने वाले महानायकों का त्याग देश के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा.
उन्होंने कहा कि जनजातीय गौरव और स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीक सिदो-कान्हू मुर्मु (Sido-Kanhu Murmu), चांद-भैरव और वीरांगनाओं फूलो-झानो ने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध जो शंखनाद किया था, उसने पराधीनता के खिलाफ पूरे देश में प्रतिरोध की नई चेतना का संचार किया. शाह ने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए किया गया यह संघर्ष भारतीय इतिहास में जनजातीय स्वाभिमान का सबसे गौरवशाली अध्याय है.

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अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा
वहीं, झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी (Babulal Marandi) ने भी रांची स्थित सिद्धो-कान्हू पार्क में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए.
मरांडी ने कहा कि हूल क्रांति के नायकों का बलिदान आज भी समाज को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए प्रेरित करता है. उन्होंने कहा कि वर्ष 1855 में संथाल परगना की वीरभूमि से ब्रिटिश शासन की दमनकारी और शोषणकारी नीतियों के खिलाफ शुरू हुआ ‘हूल’ आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक मोड़ था.
उन्होंने कहा कि सिदो, कान्हू, चांद, भैरव और वीरांगना फूलो-झानो के नेतृत्व में संथाल समाज ने विदेशी सत्ता को सीधी चुनौती दी थी. यह आंदोलन केवल एक विद्रोह नहीं था, बल्कि जल, जंगल, जमीन और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए शुरू किया गया एक व्यापक जनजागरण था.


