Click Here
Click Here
Click Here

बोकारो: हूल दिवस पर डीसी-एसपी ने सिदो-कान्हू को दी श्रद्धांजलि, कहा- 1855 का हूल 1857 की क्रांति की महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि

Bokaro: हूल दिवस के अवसर पर उपायुक्त अजय नाथ झा, पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीना, डीडीसी शताब्दी मजूमदार आदि ने चास आईटीआई...

हूल दिवस पर डीसी-एसपी ने सिदो-कान्हू को दी श्रद्धांजलि
हूल दिवस पर डीसी-एसपी ने सिदो-कान्हू को दी श्रद्धांजलि

Bokaro: हूल दिवस के अवसर पर उपायुक्त अजय नाथ झा, पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीना, डीडीसी शताब्दी मजूमदार आदि ने चास आईटीआई मोड़ स्थित अमर क्रांतिकारी सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और नमन किया. इस अवसर पर उन्होंने संथाल हूल के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे भारत के स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण आधारशिला बताया.

1857 की क्रांति की पृष्ठभूमि था संथाल हूल

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्ष 1855 का संथाल हूल केवल आदिवासी इतिहास की घटना नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण अध्याय है. यह जनविद्रोह 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तैयार करने वाला आंदोलन था, जिसने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध व्यापक जनजागरण और संगठित प्रतिरोध का मार्ग प्रशस्त किया. उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के विरुद्ध इस ऐतिहासिक संघर्ष का नेतृत्व एक ही परिवार के वीर क्रांतिकारियों सिदो, कान्हू, चाँद, भैरव, फूलो और झानो ने किया. इन महान सेनानियों ने शोषण, अन्याय और ईस्ट इंडिया कंपनी की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध संथाल समाज को संगठित कर अदम्य साहस और बलिदान का परिचय दिया. उनका संघर्ष आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ स्वतंत्रता और न्याय के लिए पूरे देश को प्रेरित करने वाला था.

ALSO READ: कोडरमा: आवंटन के बावजूद आउटसोर्सिंग कर्मियों को मानदेय भुगतान नहीं होने से कर्मचारियों में रोष

नई पीढ़ी को प्रेरणा लेने का आह्वान

उपायुक्त ने कहा कि संथाल हूल केवल एक क्षेत्रीय या आदिवासी आंदोलन नहीं था, बल्कि विदेशी शासन के विरुद्ध संगठित राष्ट्रीय प्रतिरोध का सशक्त स्वर था. 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त हुआ और भारत का प्रशासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन चला गया. इस दृष्टि से 1857 भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण मोड़ सिद्ध हुआ, जिसकी वैचारिक एवं संघर्षपूर्ण पृष्ठभूमि 1855 के संथाल हूल में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि नई पीढ़ी सिदो, कान्हू, चाँद, भैरव, फूलो और झानो जैसे महान क्रांतिकारियों के त्याग, साहस और राष्ट्रभक्ति से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए. हूल दिवस हमें अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, सामाजिक एकता और स्वतंत्रता के मूल्यों को आत्मसात करने का संदेश देता है.

add1
सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *