Chakradharpur: चक्रधरपुर के आदिवासी मित्र मंडल प्रांगण में मंगलवार को चेतन दिशोम देस परगना छोटो मुर्मू पोटका के तत्वावधान में हूल दिवस के अवसर पर जन जागृति कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक पूजा-पाठ के साथ हुई, जिसके बाद हूल आंदोलन और उसके महान योद्धाओं सिदो-कान्हू समेत अन्य शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए.
वक्ताओं ने हूल आंदोलन के इतिहास और उसके महत्व पर प्रकाश डाला
इस अवसर पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने हूल आंदोलन के इतिहास और उसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए, आदिवासी समाज के अधिकारों एवं पहचान से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. वक्ताओं ने संथाली भाषा को प्रथम राज्य भाषा का दर्जा देने, सरना धर्म कोड को मान्यता प्रदान करने तथा मरांग बुरू पारसनाथ पहाड़ी को संरक्षित करने की मांग को जोरदार ढंग से रखा.

कार्यक्रम में टाटा स्टील फाउंडेशन के शिव शंकर कांडेयांग एवं वीरेन तियु रहे उपस्थित
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में टाटा स्टील फाउंडेशन के शिव शंकर कांडेयांग एवं वीरेन तियु उपस्थित रहे. इसके अलावा रामचंद्र टुडू, राजनाथ हेम्ब्रम, कविराज मुर्मू, चैनपुर मानकी कृष्ण सामाड, विजय मेलगांडी, प्रेमचंद मुर्मू, लांगो माझी, विजय सुम्बरूई, चम्पाई बोयपाई, अनुप्रिया सोय, विजय सिंह गागराई, विजय कुमार हांसदा तथा धनंजय हेम्ब्रम सहित बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य लोग मौजूद थे. कार्यक्रम में आनंदपुर, सोनुवा और गोइलकेरा क्षेत्र के देश माझी, प्रधान एवं ग्रामीणों ने भी भाग लिया. वक्ताओं ने हूल दिवस के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने और आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत एवं अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया.
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